रांची | 19 अप्रैल 2026: महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री Dipika Pandey Singh ने केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
“महिला आरक्षण के नाम पर नियंत्रण की कोशिश”: Dipika Pandey Singh
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार महिला आरक्षण के नाम पर पूरी प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में रखना चाहती है, जिससे उसकी नीयत पर संदेह होना स्वाभाविक है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विपक्ष ने समर्थन दिया था, क्योंकि उम्मीद थी कि जनगणना के बाद ओबीसी वर्ग को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। लेकिन तीन साल तक इसे लागू नहीं करना और अब बिना जनगणना के परिसीमन की बात करना, संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है।
“सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल”: Dipika Pandey Singh
उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में महिलाओं के प्रति संवेदनशील होती, तो उन्नाव, हाथरस, कठुआ और मणिपुर जैसी घटनाओं पर चुप्पी नहीं साधती। महिला खिलाड़ियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश की बेटियां न्याय की मांग कर रही थीं, तब भी सरकार मौन रही।
“विपक्ष पर आरोप भ्रामक”: Dipika Pandey Singh
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि कांग्रेस पर आरोप लगाना भ्रामक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2023 में महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने में विपक्ष ने पूरा सहयोग दिया था। इसके बावजूद इसे लागू करने में देरी और हाल में देर रात नोटिफिकेशन जारी करना सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
“तत्काल लागू हो 33% आरक्षण”
दीपिका पांडेय सिंह ने साफ मांग रखी कि लोकसभा, राज्यसभा और सभी विधानसभाओं में तुरंत 33% महिला आरक्षण लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को वास्तविक और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सके।
महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ नीति का नहीं, बल्कि राजनीतिक नीयत का सवाल बन गया है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और समय को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा देश की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।



