
लोकसभा में परिसीमन बिल पेश, सत्ता-विपक्ष में तीखी नोकझोंक
नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया, जब कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसीमन से जुड़ा विधेयक पेश किया। बिल पेश होते ही विपक्ष ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया और सदन में तीखी बहस देखने को मिली।
बिल पेश होते ही हंगामा
कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने विधेयक का विरोध करते हुए इसे देश के संघीय ढांचे पर हमला बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब संसद पहले ही महिला आरक्षण से जुड़ा कानून पारित कर चुकी है, तो इस बिल की आवश्यकता क्यों पड़ी।
सरकार का जवाब—चर्चा के लिए तैयार
इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर खुली चर्चा के लिए तैयार है और विपक्ष को पूरा समय दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी सवालों का जवाब दिया जाएगा और किसी भी मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण असंवैधानिक है। साथ ही उन्होंने बताया कि 2027 की जनगणना की तैयारी चल रही है और सरकार ने जाति आधारित गणना कराने का निर्णय लिया है।
सपा और कांग्रेस का कड़ा रुख
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार द्वारा लाए गए सभी संबंधित विधेयकों का विरोध करती है। उनका आरोप है कि महिला आरक्षण और परिसीमन को अलग-अलग तरीके से पेश कर भ्रम पैदा किया जा रहा है।
वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि मौजूदा 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें सीधे महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं।
पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह सत्र महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार इस दिशा में ठोस निर्णय लेगी।
रिजिजू की अपील
संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि परिसीमन को लेकर अफवाहें न फैलाएं और इस मुद्दे पर सकारात्मक सहयोग करें।
दक्षिण भारत से भी विरोध
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस विधेयक का कड़ा विरोध करते हुए इसकी प्रति जलाकर प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे “काला कानून” बताते हुए कहा कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, परिसीमन (Delimitation) का सीधा संबंध लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से है। विपक्ष का आरोप है कि इसे महिला आरक्षण के साथ जोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
वहीं सरकार का कहना है कि यह कदम लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए जरूरी है।



