मिशन शांति: 48 घंटे, 8 देश और PM Modi की ‘फोन कॉल डिप्लोमेसी’
PM Modi ने जिन 8 देशों के नेताओं से संपर्क साधा है, उनमें UAE, इजरायल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर शामिल हैं। 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों में अस्थिरता पैदा कर दी है।
प्रमुख नेताओं से हुई चर्चा के मुख्य बिंदु: PM Modi
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सऊदी अरब और बहरीन: पीएम मोदी ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से बात कर उनके देशों की संप्रभुता पर हुए हमलों की निंदा की।
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कतर और ओमान: कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ चर्चा में क्षेत्र की अखंडता और राजनयिक प्रयासों के जरिए शांति पर जोर दिया गया।
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इजरायल और जॉर्डन: इजरायली पीएम नेतन्याहू से बातचीत में मोदी ने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और शत्रुता को तुरंत समाप्त करने की अपील की।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: सबसे बड़ी प्राथमिकता: PM Modi
भारत के लिए यह युद्ध केवल एक वैश्विक संकट नहीं, बल्कि मानवीय चिंता का विषय भी है। खाड़ी देशों में भारत की एक बड़ी आबादी बसती है।
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90 लाख भारतीयों का घर: खाड़ी के देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Remittance) में अहम योगदान देते हैं।
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सरकार का सुरक्षा कवच: पीएम मोदी ने हर नेता से बातचीत के दौरान वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी उनके सहयोग की अपेक्षा की।
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कंटिंजेंसी प्लान: भारत सरकार ने स्थिति बिगड़ने पर निकासी (Evacuation) की संभावनाओं को देखते हुए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक भी की है।
मध्य-पूर्व में तनाव का कारण और मौजूदा स्थिति: PM Modi
यह संकट तब और गहरा गया जब 28 फरवरी, 2026 को इजरायल और अमेरिका ने ईरान के भीतर महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला किया। खबरों के मुताबिक, इसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई उच्चाधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ पड़ोसी खाड़ी देशों पर भी मिसाइल और ड्रोन दागे हैं।
भारत के लिए क्यों जरूरी है शांति?
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ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है।
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व्यापार मार्ग: लाल सागर और खाड़ी के व्यापारिक मार्ग बाधित होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है।
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तटस्थ भूमिका: भारत किसी भी पक्ष का समर्थन करने के बजाय “संवाद और कूटनीति” (Dialogue and Diplomacy) के जरिए समाधान का पक्षधर रहा है।



