
सारंडा में 40 घंटे की मुठभेड़ थमी, सर्च ऑपरेशन जारी; घेराबंदी में फंसे टॉप नक्सली
चाईबासा: झारखंड के सारंडा जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच चली करीब 40 घंटे की मुठभेड़ अब थम गई है, लेकिन ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है। तीसरे दिन गोलीबारी बंद रही, हालांकि पूरे इलाके में सघन सर्च अभियान जारी है। इस बड़े ऑपरेशन ने नक्सलियों को पूरी तरह दबाव में ला दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, कभी ग्रामीणों को डराकर अपना प्रभाव बनाए रखने वाले नक्सली अब खुद गांव वालों से मदद मांगते नजर आ रहे हैं। वे चावल और अन्य जरूरी सामान के लिए ग्रामीणों पर निर्भर हो गए हैं, जो उनके कमजोर पड़ते नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
कैसे शुरू हुई मुठभेड़
बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों का आमना-सामना हो गया। शुरुआती फायरिंग के साथ ही आईईडी ब्लास्ट भी हुए, जिसमें कोबरा बटालियन के दो अधिकारियों समेत कुल पांच जवान घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर रांची भेजा गया।
दूसरे दिन बढ़ी घेराबंदी
गुरुवार को सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन और तेज कर दिया। इस दौरान एक और जवान आईईडी की चपेट में आकर घायल हुआ। जंगल में लगातार मूवमेंट और घेराबंदी के कारण नक्सलियों की गतिविधियां सीमित होती गईं।
तीसरे दिन थमी गोलीबारी
शुक्रवार को देर रात से फायरिंग बंद हो गई। हालांकि जवान अभी भी ‘लेइंग अप पोजिशन’ में रहकर सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। पूरे इलाके को घेरकर नक्सलियों को बाहर निकलने का कोई मौका नहीं दिया जा रहा है।
टॉप नक्सली नेतृत्व घिरा
पुलिस सूत्रों का दावा है कि इस ऑपरेशन में Communist Party of India (Maoist) के कई बड़े नेता घेराबंदी में फंसे हैं। करीब 10 किलोमीटर के दायरे में पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी स्तर के करीब 20 कमांडर मौजूद बताए जा रहे हैं, जिनमें कई महिला नक्सली भी शामिल हैं।
एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा और असीम मंडल भी इसी घेरे में बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अब उनके पास सरेंडर या मुठभेड़ के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
बड़े स्तर पर चल रहा संयुक्त ऑपरेशन
इस अभियान में Central Reserve Police Force की कोबरा बटालियन, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही है। अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती से पूरे इलाके की घेराबंदी और सख्त कर दी गई है।
नक्सलियों की आखिरी कोशिश
घेराबंदी से बचने के लिए नक्सलियों ने जंगल में जगह-जगह लैंड माइंस बिछा दी हैं, ताकि सुरक्षाबलों की बढ़त रोकी जा सके। हालांकि बम निरोधक दस्ते और प्रशिक्षित जवानों की मदद से ऑपरेशन सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों का प्रभाव अब खत्म होने की कगार पर है। आने वाले दिनों में इस ऑपरेशन से बड़ा परिणाम सामने आ सकता है।



