
Jharkhand DMF Fund: ₹19,261 करोड़ जमा, खर्च हुए ₹10,750 करोड़; धनबाद-लातेहार में उपयोगिता दर सबसे कम
Ranchi: झारखंड के खनिज बहुल जिलों में विकास कार्यों के लिए जुटाए जाने वाले जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMF) फंड के उपयोग को लेकर जुलाई 2026 तक के आधिकारिक आंकड़े तस्वीर का एक अलग पहलू सामने रखते हैं। राज्यभर में DMF के तहत कुल ₹19,261.89 करोड़ की राशि जुटाई गई है।
इन आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 39,298 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से 27,685 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, कुल ₹15,671.96 करोड़ की राशि योजनाओं के लिए स्वीकृत की गई, लेकिन इसमें से ₹10,750.94 करोड़ ही खर्च हो सके।
आंकड़ों के आधार पर स्वीकृत राशि के मुकाबले खर्च की कुल उपयोगिता दर करीब 68.60% रही है। अलग-अलग जिलों में DMF फंड के उपयोग की स्थिति में काफी अंतर दिखाई देता है।
धनबाद और लातेहार में उपयोगिता दर कम
खनिज संपदा के लिए देशभर में चर्चित धनबाद में DMF के तहत सबसे अधिक राशि संग्रहित होने वाले जिलों में शामिल है। यहां कुल ₹4,389.14 करोड़ का DMF संग्रह हुआ और ₹3,724.75 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत की गईं।
हालांकि, अब तक केवल ₹1,890.14 करोड़ खर्च हो सके हैं। इस आधार पर धनबाद की फंड उपयोगिता दर 50.75% रही।
वहीं, लातेहार में कुल ₹699.46 करोड़ का फंड संग्रह हुआ। यहां ₹559.03 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत हुईं, जबकि खर्च केवल ₹266.55 करोड़ हुआ। जिले की उपयोगिता दर 47.68% दर्ज की गई, जो दिए गए आंकड़ों में सबसे कम है।
पाकुड़ और चतरा की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण
पाकुड़ में कुल ₹1,013.14 करोड़ का DMF संग्रह हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यहां फंड उपयोगिता दर करीब 50.01% रही।
इसी तरह चतरा में कुल ₹1,842.89 करोड़ का फंड संग्रह हुआ, जबकि उपयोगिता दर 58.24% दर्ज की गई।
इन जिलों के आंकड़े बताते हैं कि DMF के तहत राशि उपलब्ध होने के बावजूद स्वीकृत परियोजनाओं पर खर्च की रफ्तार समान नहीं है।
पश्चिमी सिंहभूम और बोकारो का बेहतर प्रदर्शन
दूसरी ओर, कुछ जिलों में DMF फंड के उपयोग की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है।
पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में कुल ₹4,078.37 करोड़ का DMF संग्रह हुआ। यहां 8,946 परियोजनाएं स्वीकृत की गईं, जिनमें से 7,695 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
जिले में ₹2,504.49 करोड़ की राशि स्वीकृत हुई, जिसमें से ₹2,097.02 करोड़ खर्च किए गए। इस तरह उपयोगिता दर 83.73% रही।
वहीं बोकारो में ₹1,509.10 करोड़ का कुल DMF संग्रह दर्ज किया गया। यहां ₹1,637.79 करोड़ की योजनाएं स्वीकृत होने और ₹1,395.80 करोड़ खर्च होने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उपयोगिता दर 85.22% रही।
गुमला और देवघर में भी फंड उपयोग बेहतर
गुमला में DMF फंड की उपयोगिता दर 89.57% दर्ज की गई है। यहां ₹131.67 करोड़ खर्च किए गए हैं।
वहीं देवघर में उपयोगिता दर 87.04% रही और यहां ₹201.35 करोड़ खर्च किए जाने की जानकारी दी गई है।
DMF फंड का उद्देश्य क्या है?
जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) का उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों और वहां रहने वाले लोगों के हित में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आधारभूत संरचना और अन्य प्राथमिक जरूरतों से जुड़ी परियोजनाओं पर राशि खर्च की जाती है।
जुलाई 2026 तक के आंकड़ों से स्पष्ट है कि झारखंड में DMF के तहत बड़ी राशि उपलब्ध है, लेकिन जिलों के बीच फंड उपयोग की गति में काफी अंतर है। जहां कुछ जिलों में 80 से 90 प्रतिशत के आसपास उपयोगिता दर्ज की गई है, वहीं धनबाद, लातेहार और पाकुड़ जैसे जिलों में यह 50 प्रतिशत के आसपास या उससे कम है।



