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चांडिल डैम का जलस्तर 181.02 मीटर पहुंचा, 13 गेट से छोड़ा गया 2020 क्यूमेक्स पानी

40+ गांवों के खेत प्रभावित

चांडिल डैम का जलस्तर 181.02 मीटर पहुंचा, 13 गेट से छोड़ा गया 2020 क्यूमेक्स पानी; 40 से ज्यादा गांवों के खेत प्रभावित

 

सरायकेला-खरसावां: चांडिल सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के चांडिल डैम का जलस्तर शुक्रवार रात 9 बजे 181.02 मीटर आरएल तक पहुंच गया। जलाशय में पानी की आवक लगातार जारी रहने के कारण डैम के 13 रेडियल गेट खोलकर सुवर्णरेखा नदी में कुल 2020 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है।

 

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, 13 गेटों में से चार गेट 2.5 मीटर, पांच गेट 2 मीटर और चार गेट 25 सेंटीमीटर तक खोले गए हैं। रात में डिस्चार्ज में 260 क्यूमेक्स की बढ़ोतरी की गई।

 

40 से अधिक गांवों के निचले इलाकों में पहुंचा पानी

 

डैम का जलस्तर 181 मीटर के पार पहुंचने के बाद ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के नीमडीह, कुकड़ू, चांडिल और ईचागढ़ प्रखंड के 40 से अधिक गांवों के निचले खेतों में पानी घुसने की बात सामने आई है। खेतों में खड़ी धान की फसल और सब्जियों के डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

 

विस्थापितों ने सूचना व्यवस्था पर उठाए सवाल

 

चांडिल प्रखंड प्रमुख रामकृष्ण महतो और विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने डैम के जलस्तर और पानी छोड़ने की सूचना सार्वजनिक करने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

 

राकेश रंजन महतो का कहना है कि चांडिल डैम के जलस्तर, गेट खोलने और डिस्चार्ज की नियमित जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। उन्होंने डैम के जलस्तर की हर घंटे जानकारी सार्वजनिक करने और रात में डिस्चार्ज बढ़ाने से पहले प्रभावित गांवों में पूर्व चेतावनी व्यवस्था लागू करने की मांग की।

 

किसानों को मुआवजा देने की मांग

 

चांडिल प्रखंड प्रमुख रामकृष्ण महतो ने कहा कि वे खुद विस्थापित परिवार से आते हैं और प्रभावित लोगों की समस्या को समझते हैं। उनके अनुसार ईचागढ़, नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड के इलाके अधिक प्रभावित हैं।

 

उन्होंने सरकार से पानी में डूबी धान की फसल, सब्जियों और किसानों की अन्य उपज के नुकसान का मुआवजा देने की मांग की। साथ ही लंबे समय से लंबित विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को भी उठाया।

 

परियोजना के उद्देश्य पर भी सवाल

 

प्रमुख ने आरोप लगाया कि चांडिल डैम को बहुउद्देशीय परियोजना कहा जाता है, लेकिन इसका लाभ मुख्य रूप से औद्योगिक इकाइयों को मिल रहा है। उन्होंने विस्थापितों के पुनर्वास, रखरखाव और अन्य कार्यों के लिए आने वाले फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी नहीं मिलने का दावा किया।

 

विस्थापित प्रतिनिधियों ने कहा कि ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर लंबे समय से लंबित विस्थापन और पुनर्वास की समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।

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