पटना: जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष Tej Pratap Yadav ने बिहार की राजनीति में अपनी नई राह बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। सोमवार को उन्होंने घोषणा की कि होली (मार्च 2026) के बाद वे पूरे बिहार में पैदल यात्रा पर निकलेंगे। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (PK) की तर्ज पर शुरू होने वाली इस यात्रा का उद्देश्य जमीनी स्तर पर पार्टी के संगठन का विस्तार करना और आम लोगों की समस्याओं से सीधे जुड़ना है।
“पीके स्टाइल” में स्वीकार्यता की तलाश Tej Pratap Yadav
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के बाद तेज प्रताप अपनी नई पार्टी जेजेडी के अस्तित्व को बचाने और उसे मजबूत करने में जुटे हैं। उन्होंने पटना में मीडिया से कहा:
- संगठनात्मक पुनर्गठन: यात्रा के माध्यम से पार्टी के पुराने ढांचे को बदला जाएगा और युवाओं को बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी।
- जनसंवाद: प्रशांत किशोर की तरह ही तेज प्रताप भी गांवों में रात गुजारेंगे और लोगों की समस्याएं सुनकर उनके निदान का प्रयास करेंगे।
- महुआ से संदेश: महुआ सीट पर तीसरे स्थान पर रहने के बाद, वे अब अपनी स्वीकार्यता को पूरे प्रदेश में फैलाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
आरजेडी के ‘जयचंदों’ पर फूटा गुस्सा Tej Pratap Yadav
अपनी यात्रा के ऐलान के साथ ही तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के करीबियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरजेडी के पाँच नेताओं को “जयचंद” (गद्दार) करार देते हुए उन पर गंभीर आरोप लगाए:
- नामों का खुलासा: उन्होंने संजय यादव (राज्यसभा सांसद), सुनील सिंह (MLC), मुकेश रौशन (पूर्व विधायक), शक्ति सिंह यादव और रमीज का नाम सार्वजनिक रूप से लिया।
- बदनाम करने की साजिश: तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने उनके सोशल मीडिया अकाउंट को हैक किया और उनके व्यक्तिगत जीवन को लेकर भ्रामक अफवाहें फैलाईं।
- तेजस्वी की चुप्पी पर सवाल: उन्होंने अपने भाई तेजस्वी यादव की चुप्पी पर भी हैरानी जताई और कहा कि ये लोग परिवार और पार्टी को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
पार्टी विलय की सलाह
मकर संक्रांति के अवसर पर दिए गए ‘दही-चूड़ा भोज’ की सफलता से उत्साहित तेज प्रताप ने हाल ही में तेजस्वी को यह सलाह तक दे डाली थी कि उन्हें अपनी पार्टी आरजेडी का विलय जेजेडी में कर देना चाहिए, क्योंकि आरजेडी अब ‘जयचंदों’ के चंगुल में है।
“मैं लालू जी का बेटा हूँ, संघर्ष करना मेरे खून में है। होली के बाद मेरी पदयात्रा बिहार की राजनीति की दिशा बदलेगी। हम गांव-गांव जाएंगे और असल सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ेंगे।”



