
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह जल्द ही Prashant Kishor की अगुवाई वाले जन सुराज अभियान के साथ जुड़ सकते हैं।
इतना ही नहीं, अपनी पार्टी ‘आप सबकी आवाज’ (आसा) का विलय भी जन सुराज में करने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
इस खबर के बाद राज्य की राजनीतिक फिज़ा में गर्माहट आ गई है। रविवार, 18 मई 2025 को पटना में दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस होने की संभावना है, जिसमें इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।
Prashant Kishor News: पार्टी विलय की घोषणा संभव
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जन सुराज की प्रेस कॉन्फ्रेंस सुबह 10 बजे, पाटलिपुत्र गोलंबर स्थित जन सुराज कैंप (होटल ऑरम के बगल में) आयोजित होगी। इस कार्यक्रम में खुद प्रशांत किशोर के साथ आरसीपी सिंह के मंच साझा करने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो यह जन सुराज के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक समर्थन माना जाएगा।
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Prashant Kishor News: राजनीतिक पृष्ठभूमि और समीकरण
आरसीपी सिंह ने 31 अक्टूबर 2024 को दीपावली के दिन अपनी पार्टी ‘आप सबकी आवाज’ (आसा) की घोषणा की थी और दावा किया था कि उनकी पार्टी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
हालांकि, उन्हें अपेक्षित जन समर्थन नहीं मिला। इससे पहले वे नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में मंत्री रह चुके हैं और 2023 में बीजेपी से जुड़ गए थे।
जनवरी 2024 में नीतीश कुमार के फिर से एनडीए में लौटने के बाद, आरसीपी सिंह बीजेपी में हाशिए पर चले गए। राजनीतिक तौर पर अलग-थलग पड़ने के बाद अब उन्होंने प्रशांत किशोर की ओर रुख किया है, जो स्वयं 2022 में जेडीयू से बाहर हो चुके हैं।
Prashant Kishor News: राजनीति में एक नई धुरी की शुरुआत?
विश्लेषकों का मानना है कि आरसीपी सिंह का जन सुराज में आना प्रशांत किशोर के लिए एक अनुभवी राजनीतिक चेहरा जोड़ने जैसा होगा। इससे संगठन को संवैधानिक साख और जातीय संतुलन हासिल हो सकता है, खासकर कोइरी-लव कुश वोट बैंक में पैठ बनाने में।
अब आगे क्या?
फिलहाल आरसीपी सिंह या उनकी पार्टी की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन जन सुराज द्वारा प्रेस आमंत्रण जारी कर दिए गए हैं। अगर रविवार को यह गठबंधन औपचारिक हो जाता है, तो यह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले विपक्ष और एनडीए दोनों के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।
बिहार की राजनीति में यह संभावित गठबंधन एक नया समीकरण तैयार कर सकता है, जो जातीय, वैचारिक और रणनीतिक स्तर पर कई दलों की गणित को प्रभावित करेगा। अब सबकी नजरें 18 मई को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां इस ‘नई जोड़ी’ की सियासी दिशा स्पष्ट होगी।
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