
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक Shibu Soren का निधन 4 अगस्त 2025 को दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में हुआ। वे किडनी की गंभीर समस्याओं, डायबिटीज़ और दिल की बीमारी से जूझ रहे थे।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दुख की इस घड़ी में उनके परिजनों से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उनका पूरा जीवन जनजातीय समाज के कल्याण के लिए समर्पित रहा, जिसके लिए वे सदैव याद किए जाएंगे।@HemantSorenJMM @JMMKalpanaSoren pic.twitter.com/ts5X0C3EiM
— Narendra Modi (@narendramodi) August 4, 2025
अस्पताल में लंबी अवधि तक भर्ती रहने और जीवनरक्षक प्रणाली पर रहने के बावजूद, उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया और उन्होंने 81 वर्ष की उम्र में अंतिम साँस ली।
उनके निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल पहुँचे। पीएम मोदी ने शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार से भी मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री भावुक झारखंड मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मिले, उन्हें सांत्वना दी और इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
Shibu Soren News: प्रारंभिक जीवन, बचपन और शिक्षा
शिबू सोरेन का जन्म 11 जनवरी 1944 को रामगढ़ ज़िले के नेमरा गाँव, संथाल आदिवासी परिवार में हुआ था। उनके पिता, शोबरन मांझी, शिक्षा और सामाजिक चेतना के लिए जाने जाते थे, लेकिन शिबू के किशोरावस्था में ही, महाजनों द्वारा उनकी हत्या कर दी गई। इस हादसे ने शिबू के जीवन को सामाजिक न्याय की दिशा में मोड़ दिया।
प्रारंभिक पढ़ाई गाँव में ही हुई, और फिर वे हजारीबाग के गोला हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन पास हुए। स्कूल में रहते हुए उन्होंने ‘संथाल नवयुवक संघ’ शुरू किया और आदिवासी उत्थान का बीड़ा उठाया।
Shibu Soren News: राजनीतिक सफर
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झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना:
1972 में, बिनोद बिहारी महतो और एके रॉय के साथ मिलकर, शिबू सोरेन ने ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ (JMM) की नींव रखी। उद्देश्य था जल, जंगल, ज़मीन और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा, साथ ही अलग झारखंड राज्य के लिए संघर्ष। -
अलग झारखंड आंदोलन:
महाजनों के शोषण के विरुद्ध उन्होंने ‘धनकटनी आंदोलन’ और अन्य आंदोलनों का नेतृत्व किया। चिरूडीह और कुकड़ो कांड उनकी राजनीतिक यात्रा के बेहद अहम पड़ाव रहे। -
जनप्रतिनिधित्व और मंत्री पद:
वह 1980 से 2019 तक दुमका से सात बार लोकसभा सांसद बने और राज्यसभा में भी रहे। 2004-2006 में केंद्र सरकार में कोयला मंत्री रहे। -
मुख्यमंत्री के तौर पर तीन बार:
झारखंड बनने के बाद तीन बार (2005, 2008-09, 2009-10) मुख्यमंत्री बने, हालांकि राजनीतिक अस्थिरता के चलते कार्यकाल छोटे रहे।
Shibu Soren News: झारखंड आंदोलन और विरासत
JMM के ज़रिए चार दशक तक भूमि, शिक्षा, पहचान और अधिकारों के लिए आवाज़ उठायी। परिणामस्वरूप 2000 में झारखंड एक अलग राज्य बना। समर्थकों के बीच वह ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से प्रसिद्ध रहे। जीवन भर विभिन्न न्यायिक एवं सियासी विवादों का सामना कर, आदिवासी स्वाभिमान का प्रतीक बने।
विशेष अपडेट: प्रधानमंत्री की उपस्थिति
शिबू सोरेन के निधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर गंगा राम अस्पताल जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर मोदी ने शिबू सोरेन के परिवार, खासकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की और उनकी भावनाओं को सांझा किया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया संदेश में लिखा—
“Went to Sir Ganga Ram Hospital to pay homage to Shri Shibu Soren Ji. Also met his family. My thoughts are with Hemant Ji, Kalpana Ji and the admirers of Shri Shibu Soren Ji”—और व्यक्तिगत तौर पर भी हेमंत सोरेन को सांत्वना दी।
शिबू सोरेन की यात्रा एक महान आदिवासी नेता, राज्य निर्माता, और सामाजिक चेतना के सूत्रधार के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।



