
बोकारो। Shibu Soren: सामाजिक न्याय, आदिवासी अस्मिता और झारखंड के सर्वांगीण विकास के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए बुधवार को बोकारो में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
बोकारो जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिकारियों ने उनके विचारों पर प्रकाश डाला।
Shibu Soren News: गुरुजी जाति-धर्म से ऊपर थे
संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद प्रसिद्ध लेखक और चिंतक अनुज कुमार सिन्हा ने शिबू सोरेन के जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरुजी जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी वर्गों को साथ लेकर चलते थे। उन्होंने बताया कि किस तरह शिबू सोरेन ने अपने पिता की हत्या के बाद शोषणकारी महाजनी प्रथा को खत्म करने का संकल्प लिया और अपने साहस से आदिवासी समाज को इस कुप्रथा से मुक्ति दिलाई।

Shibu Soren News: सांस्कृतिक चेतना और विकास
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. अभय सागर मिंज ने कहा कि आदिवासी पहचान केवल जंगल, पत्ता और नृत्य तक सीमित नहीं है। उन्होंने इस मानसिकता को बदलने की बात कही और बताया कि शिबू सोरेन ने किस तरह ‘सांस्कृतिक सापेक्षता’ को बढ़ावा दिया। उन्होंने 1970 के दशक में शुरू किए गए 19 सूत्री विकास मॉडल का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य आदिवासी समाज का समग्र विकास करना था।

Shibu Soren News: बोकारो में शुरू होंगी नई पहल
बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा ने भी शिबू सोरेन को याद किया और कहा कि हमें आदिवासियों को सिखाने के बजाय उनसे सीखना चाहिए। उन्होंने इस मौके पर ‘दिशोम गुरु’ की स्मृति में जिले में कई नई पहलों की घोषणा की:
- रात्रि पाठशाला: बोकारो की सभी पंचायतों में रात्रि पाठशाला का आयोजन किया जाएगा, जहाँ मजदूर, किसान और बुजुर्ग शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
- 24×7 पुस्तकालय: पूरे जिले में 24 घंटे चलने वाले पुस्तकालयों का संचालन होगा।
- नशामुक्ति अभियान: समाज और प्रशासन मिलकर नशामुक्ति के खिलाफ अभियान चलाएंगे।
- प्रतिमा की स्थापना: शिबू सोरेन की कर्मस्थली लुगुबुरू घंटाबाड़ी में कार्तिक पूर्णिमा से पहले उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

यह संगोष्ठी इस संकल्प के साथ समाप्त हुई कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन और उनके विचार हमेशा प्रेरणा बने रहेंगे।



