बिहार में ‘वंदे मातरम’ अनिवार्य, स्कूल-मदरसा और सरकारी कार्यक्रमों के लिए नया आदेश

बिहार में ‘वंदे मातरम’ पर सियासत तेज, नए आदेश से बढ़ा विवाद

बिहार में ‘वंदे मातरम’ पर नया आदेश: स्कूल, मदरसा और सरकारी कार्यक्रमों में अनिवार्य गायन, जानें नियम और विवाद

पटना 

बिहार सरकार ने राज्यभर के स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों और सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के अनिवार्य गायन को लेकर नया आदेश जारी किया है। 26 अप्रैल 2026 को जारी इस निर्देश के अनुसार अब हर शैक्षणिक संस्थान और सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत ‘वंदे मातरम’ से होगी, इसके बाद ‘जन गण मन’ और अंत में राज्य गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ गाया जाएगा।


कहां-कहां लागू होगा नया नियम?

सरकार के आदेश के मुताबिक:

यह आदेश केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुरूप लागू किया गया है।


क्या नहीं मानने पर सजा है?

फिलहाल सरकार ने इसे लेकर कोई दंड या जुर्माना तय नहीं किया है
हालांकि, राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ का अपमान Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 के तहत दंडनीय है, जिसमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।


क्या ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य है?

कानूनी स्थिति थोड़ी अलग है।
सुप्रीम कोर्ट के 2017 के फैसले (अश्विनी उपाध्याय बनाम भारत संघ) में स्पष्ट किया गया था कि संविधान में ‘राष्ट्रगीत’ को अनिवार्य रूप से गाने की बाध्यता नहीं है।
यानी सरकार गाइडलाइन दे सकती है, लेकिन किसी को मजबूर करना कानूनी बहस का विषय बन सकता है।


सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

मुख्यमंत्री Samrat Choudhary सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य:


विवाद क्यों?

‘वंदे मातरम’ को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है।
यह गीत Bankim Chandra Chatterjee ने लिखा था और बाद में अपने उपन्यास आनंदमठ में शामिल किया।

कुछ मुस्लिम संगठनों और नेताओं का मानना है कि गीत के कुछ अंश धार्मिक दृष्टि से विवादित हैं, क्योंकि इसमें राष्ट्र को देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वहीं, कई राजनीतिक दल इसे भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का प्रतीक मानते हैं।


बड़ा सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह आदेश केवल सांस्कृतिक पहल है या इसके राजनीतिक मायने भी हैं?

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