धनबाद भू-धसान पर सियासी घमासान: चंद्रशेखर अग्रवाल का राज सिन्हा पर हमला, धरने को बताया ‘टांय-टांय फिस्स’
कोयलांचल के केन्दुआडीह में हुए हालिया भू-धसान ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच डर और अनिश्चितता का माहौल है, वहीं इस मुद्दे पर नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
सोमवार को धनबाद सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में Jharkhand Mukti Morcha (JMM) के वरिष्ठ नेता और पूर्व महापौर Chandrashekhar Agrawal ने भाजपा विधायक Raj Sinha के अनिश्चितकालीन धरने पर तीखा हमला बोला।
“धरना सिर्फ दिखावा, जनता को गुमराह करने की कोशिश”
चंद्रशेखर अग्रवाल ने विधायक के धरने को “टांय-टांय फिस्स” बताते हुए कहा कि यह प्रदर्शन पीड़ितों के प्रति संवेदना नहीं, बल्कि राजनीतिक स्टंट है।
उन्होंने कहा,
“केन्दुआडीह की जनता भय में जी रही है और उन्हें ठोस समाधान चाहिए, लेकिन विधायक सिर्फ दिखावा कर रहे हैं। यह धरना जमीनी स्तर पर बेअसर साबित हुआ है।”
अग्रवाल ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्र में उनकी अपनी सरकार है और Bharat Coking Coal Limited (BCCL) जैसे उपक्रमों पर प्रभाव है, तो फिर धरने की जरूरत क्यों पड़ी?
भू-धसान से दहशत में लोग
हाल ही में केन्दुआडीह क्षेत्र में हुए भू-धसान के कारण कई घरों को खतरा पैदा हो गया है। कई परिवार असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।
इसी मुद्दे को लेकर विधायक राज सिन्हा ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था, जिसे वे “जनता की आवाज” बता रहे हैं।
BJP vs JMM: आरोप-प्रत्यारोप तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद Bharatiya Janata Party (BJP) और JMM के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।
- BJP का कहना है कि धरना प्रभावितों के हक की लड़ाई है
- JMM इसे “राजनीतिक ड्रामा” और “जनता को भ्रमित करने की कोशिश” बता रही है
असली सवाल अब भी कायम
सियासी बयानबाजी के बीच सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है—
क्या भू-धसान प्रभावित परिवारों को जल्द सुरक्षित पुनर्वास और स्थायी समाधान मिल पाएगा?
निष्कर्ष:
धनबाद का भू-धसान अब सिर्फ एक प्राकृतिक या तकनीकी समस्या नहीं रहा, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। लेकिन असली जरूरत प्रभावित लोगों की सुरक्षा और पुनर्वास की है, जिस पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है।
