JPSC JET Exam 2026: सवालों में गड़बड़ी, अंग्रेजी पेपर में एक ही प्रश्न दो बार—‘Option D’ भी गायब
झारखंड में आयोजित Jharkhand Public Service Commission (JPSC) की झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) एक बार फिर विवादों में आ गई है। रविवार को हुई इस परीक्षा में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं, जिससे अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी जा रही है।
अंग्रेजी पेपर में बड़ी चूक
अभ्यर्थियों के अनुसार, अंग्रेजी विषय के ‘D’ सीरीज प्रश्नपत्र में एक ही सवाल दो बार पूछा गया। खास तौर पर प्रश्न संख्या 55 को हू-ब-हू दोहराया गया। इतना ही नहीं, एक अन्य सवाल में उत्तर विकल्प ‘D’ ही गायब था, जिससे परीक्षार्थियों को काफी असमंजस का सामना करना पड़ा।
430 केंद्रों पर हुई परीक्षा
राज्यभर में करीब 430 परीक्षा केंद्रों पर JET का आयोजन किया गया। इस परीक्षा में सफल अभ्यर्थी असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के पात्र होंगे। परीक्षा का स्तर मिला-जुला रहा—जनरल स्टडीज का पेपर अपेक्षाकृत आसान था, जबकि दूसरे पेपर ने छात्रों को ज्यादा परेशान किया।
अभ्यर्थियों का अनुभव
तमाड़ से आए धीरेंद्र गोस्वामी ने बताया कि जनरल स्टडीज के सवाल आसान थे, लेकिन कुछ प्रश्न घुमाकर पूछे गए थे। वहीं हिंदी विषय काफी कठिन लगा।
सिमडेगा के संदीप टेटे के मुताबिक, हिंदी पेपर ठीक था, लेकिन जनरल स्टडीज में थोड़ी परेशानी आई। उन्होंने बताया कि National Education Policy 2020 (NEP 2020) से जुड़े कई सवाल पूछे गए।
केंद्र आवंटन में गड़बड़ी, कई ने छोड़ी परीक्षा
परीक्षा केंद्र आवंटन को लेकर भी भारी गड़बड़ी सामने आई। कई अभ्यर्थियों को उनके चुने गए विकल्पों के अनुसार केंद्र नहीं मिले। रांची के उम्मीदवारों को जमशेदपुर भेज दिया गया, जबकि उन्होंने यह विकल्प भरा ही नहीं था। इस अव्यवस्था से परेशान होकर सैकड़ों परीक्षार्थियों ने परीक्षा ही छोड़ दी।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस की अनदेखी
परीक्षा में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन अधिकांश केंद्रों पर इस नियम का पालन नहीं हुआ। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि इस ओर ध्यान दिलाने के बावजूद केंद्र प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई।
रांची स्टेशन पर उमड़ी भीड़, चलाई गई स्पेशल ट्रेनें
परीक्षा के कारण रांची रेलवे स्टेशन पर अभ्यर्थियों और यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। स्थिति को संभालने के लिए रेलवे ने दो स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया—एक रांची से दुमका और दूसरी रांची से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन के लिए चलाई गई, जिससे यात्रियों को राहत मिली।
निष्कर्ष:
डेढ़ दशक बाद आयोजित इस परीक्षा में सामने आई लापरवाहियों ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि इन त्रुटियों पर संज्ञान लेकर निष्पक्ष समाधान निकाला जाए।
