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रांची नगर निगम में बदला सियासी समीकरण

रांची नगर निगम में बदला सियासी समीकरण, अनारक्षित सीटों पर आदिवासी प्रत्याशियों की बड़ी जीत

Jharkhand Municipal Election Result: रांची नगर निगम में बदला सियासी समीकरण, अनारक्षित सीटों पर आदिवासी प्रत्याशियों की बड़ी जीत – nagarnikaychunav

रांची : रांची नगर निगम चुनाव के नतीजों ने शहर की राजनीति में बड़ा बदलाव संकेत दिया है। इस बार अनारक्षित (जनरल) सीटों पर भी आदिवासी उम्मीदवारों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए विरोधियों को कड़ी टक्कर दी और कई सीटों पर जीत दर्ज की।

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के अलावा सामान्य सीटों पर मिली इस सफलता ने यह साबित कर दिया है कि रांची की सियासत का मिजाज बदल रहा है।

अनारक्षित महिला सीटों पर आदिवासी महिलाओं का दम

रांची नगर निगम में कुल 27 अनारक्षित सीटें हैं। इनमें 13 सीटें अनारक्षित महिला वर्ग की हैं। इन 13 सीटों में से पांच पर आदिवासी महिलाओं ने जीत हासिल की है।

ये सीटें सामान्य वर्ग के लिए खुली थीं, जहां अन्य वर्ग के उम्मीदवार भी मैदान में थे। बावजूद इसके आदिवासी महिला प्रत्याशियों ने शानदार जीत दर्ज कर राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया।

पुरुष प्रत्याशियों ने भी दिखाया दम

14 अनारक्षित अन्य वर्ग की सीटों में से चार पर अनुसूचित जनजाति के पुरुष उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। इस तरह देखा जाए तो कुल मिलाकर आदिवासी महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक सीटों पर जीत हासिल की है।

कई वार्डों में कांटे की टक्कर

कई वार्डों में मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का रहा।

  • वार्ड 33 से पुष्पा टोप्पो ने कड़ी टक्कर के बाद अपनी सीट बरकरार रखी।

  • वार्ड 34 से अजीत भगत ने पहली बार जीत दर्ज की। इससे पहले इस वार्ड से सामान्य वर्ग के विनोद सिंह पार्षद थे, जिन्हें इस बार हार का सामना करना पड़ा।

वार्डवार विजयी प्रत्याशी

🔹 अनारक्षित महिला

  • वार्ड 03 – बसंती लकड़ा

  • वार्ड 06 – मोनिका लकड़ा

  • वार्ड 08 – किरण खलखो

  • वार्ड 33 – पुष्पा टोप्पो

  • वार्ड 50 – सुनीता तिग्गा

🔹 अनारक्षित अन्य

  • वार्ड 04 – अमित मुंडा

  • वार्ड 24 – विजय कच्छप

  • वार्ड 34 – अजीत भगत

  • वार्ड 48 – अमित मिंज

बदलते सियासी संकेत

नागारिक चुनाव: nagarnikaychunav और इसकी सामाजिक प्रभाव

नगर निगम चुनाव के इन परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रांची की राजनीति में सामाजिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अनारक्षित सीटों पर आदिवासी प्रत्याशियों की जीत आने वाले विधानसभा और अन्य चुनावों के लिए भी नए संकेत दे रही है।

 

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