दिल्ली में सियासी हलचल तेज: आज राज्यसभा की शपथ लेंगे नीतीश कुमार, पीएम मोदी-शाह से होगी मुलाकात
नई दिल्ली/पटना | बिहार की राजनीति इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रम के दौर से गुजर रही है। इसी कड़ी में नीतीश कुमार आज दोपहर 12:30 बजे राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इससे पहले शुक्रवार सुबह जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर उनसे मिलने उनके दिल्ली स्थित आवास पहुंचे।
पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात तय
शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार की मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से होने वाली है। इस बैठक में बिहार की नई राजनीतिक रणनीति, एनडीए सरकार के स्वरूप और नेतृत्व को लेकर अहम चर्चा होने की संभावना है।
बिहार में सत्ता परिवर्तन के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हो रही बैठकों में बिहार के नए मुख्यमंत्री और संभावित मंत्रिमंडल को लेकर भी मंथन चल रहा है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार शुक्रवार शाम पटना लौट सकते हैं और 13 अप्रैल को कैबिनेट की आखिरी बैठक करेंगे। इसके बाद 14 अप्रैल को उनके इस्तीफे और नए सीएम के नाम पर मुहर लगने की चर्चा है।
जेडीयू को मिल सकते हैं दो डिप्टी सीएम
एनडीए के अंदर सीट और पदों के बंटवारे को लेकर भी चर्चा तेज है। जेडीयू सूत्रों के अनुसार, इस बार पार्टी को दो डिप्टी सीएम पद मिल सकते हैं। इसमें एक नाम नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी बताया जा रहा है, जबकि दूसरे पद के लिए किसी अनुभवी नेता को मौका मिल सकता है।
हरिवंश फिर बने राज्यसभा सांसद
इस बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता हरिवंश नारायण सिंह को भी एक बार फिर राज्यसभा सांसद मनोनीत किया गया है। उनका पिछला कार्यकाल समाप्त होने के बाद द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें दोबारा नामित किया है।
विपक्ष का तंज
राजनीतिक हलचल के बीच आरजेडी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर तंज कसा। उन्होंने लिखा, “चाचा जी, लालच बुरी बला है…”—जिसके बाद सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है।
“अब यहीं रहूंगा” – नीतीश
दिल्ली पहुंचने के बाद मीडिया से बातचीत में नीतीश कुमार ने कहा कि वे अब दिल्ली में सक्रिय रहेंगे। उन्होंने कहा, “20 साल बिहार में काम किया, अब यहां भी काम करेंगे।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका पटना आना-जाना जारी रहेगा।
फिलहाल, दिल्ली में हो रही इन बैठकों पर पूरे देश की नजर है, क्योंकि इनके नतीजे बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
