Jharkhand News: झारखंड में कुपोषण और ‘छिपी भूख’ से निपटने के लिए एक नई पहल शुरू की गई है। अब राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों को मिड-डे मील के साथ पोषक तत्वों से भरपूर न्यूट्री कुकीज और न्यूट्री बार दिए जाएंगे। इस योजना का लाभ फिलहाल 8 जिलों के करीब 60 हजार स्कूली बच्चों को मिलेगा। यह पहल HarvestPlus Solutions, झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी और भारतीय लोक कल्याण संस्थान के संयुक्त प्रयास से शुरू की गई है।
इन जिलों के बच्चों को मिलेगा लाभ: Jharkhand News
योजना के तहत पाकुड़, पलामू, रांची (राहे प्रखंड), गुमला, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा और गोड्डा जिलों के चयनित प्रखंडों में बच्चों को सप्ताह में पांच दिन न्यूट्री फूड दिया जाएगा।
आदिम जनजाति बच्चों पर विशेष फोकस: Jharkhand News
यह अभियान खास तौर पर आदिम जनजाति समुदाय के बच्चों के लिए शुरू किया गया है। इनमें माल पहाड़िया, असुर और सबर जैसे समुदाय शामिल हैं, जहां कुपोषण की समस्या ज्यादा पाई जाती है। उद्देश्य है कि इन बच्चों को जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स देकर उनके स्वास्थ्य में सुधार किया जा सके।
बायोफोर्टिफाइड फसलों को बढ़ावा: Jharkhand News
इस योजना के तहत पोषक तत्वों से भरपूर बायोफोर्टिफाइड फसलों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
- आयरन के लिए बाजरा
- जिंक के लिए गेहूं और चावल
- कैल्शियम के लिए रागी
इनसे तैयार खाद्य पदार्थ बच्चों के भोजन में शामिल किए जा रहे हैं ताकि उन्हें संतुलित पोषण मिल सके।
‘न्यूट्री पाठशाला’ से बढ़ेगी जागरूकता
योजना के अंतर्गत चयनित स्कूलों में ‘न्यूट्री पाठशाला’ भी शुरू की जा रही है। स्कूल की दीवारों पर चित्रों और संदेशों के माध्यम से पोषण की जानकारी दी जाएगी। साथ ही बच्चों को न्यूट्री डायरी दी जाएगी, जिसमें उनके स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़े दर्ज होंगे। नुक्कड़ नाटक, कठपुतली शो और विशेष कक्षाओं के जरिए भी बच्चों और समुदाय को पोषण के प्रति जागरूक किया जाएगा।
किसानों और गांवों को भी जोड़ा जाएगा
इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू स्थानीय किसानों को जोड़ना भी है। पारंपरिक और पोषक बीजों को बढ़ावा देकर खेती को मजबूत किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा। झारखंड में शुरू हुआ यह अभियान न केवल बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को भी नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है। यदि इसे बड़े स्तर पर लागू किया गया, तो आने वाले समय में इसका सकारात्मक असर साफ दिखाई देगाI
