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झारखंड में अवैध खनन पर बवाल: अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे मंत्री-विधायक

सत्ता में रहते हुए ‘बगावत’: अवैध खनन पर JMM गठबंधन में घमासान

झारखंड में अवैध खनन पर सियासी घमासान: अपनी ही सरकार के खिलाफ उतरे मंत्री-विधायक, संथाल में ‘सिंडिकेट’ पर बड़े आरोप

गोड्डा/पाकुड़: झारखंड में अवैध बालू और पत्थर खनन का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला इसलिए खास है क्योंकि सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के भीतर से उठे हैं। राजद और कांग्रेस के नेताओं ने खुलकर अपनी ही सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिससे सियासी हलचल तेज हो गई है।

मंत्री ने ही उठाए सिस्टम पर सवाल

हेमंत सोरेन सरकार में राजद कोटे से मंत्री संजय प्रसाद यादव ने अवैध खनन को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संथाल परगना क्षेत्र में अवैध बालू और पत्थर का कारोबार चरम पर है। ओवरलोडेड ट्रक और हाइवा पुलिस से बचने के लिए तेज रफ्तार में भागते हैं, जिससे सड़क हादसे बढ़ रहे हैं और आम लोगों की जान जा रही है।

मंत्री ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए यहां तक कहा कि अगर इस अवैध धंधे में वह खुद भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।

विधायक ने खोला ‘कमाई’ का खेल

कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने भी जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने गोड्डा के डीसी को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि एक बालू घाट से ही प्रतिदिन करीब 27 लाख रुपये की अवैध कमाई हो रही है। उनके इस दावे ने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

पाकुड़ में कांग्रेस का हल्ला बोल

मामला केवल गोड्डा तक सीमित नहीं रहा। पाकुड़ में भी कांग्रेस नेताओं ने पत्थर माफिया के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार ने आरोप लगाया कि चेकपोस्ट होने के बावजूद बिना माइनिंग चालान के ट्रकों की आवाजाही जारी है।

उन्होंने ‘पासिंग गिरोह’ के सक्रिय होने और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि बिना संरक्षण के करोड़ों रुपये के राजस्व की चोरी संभव नहीं है। उन्होंने पियादपुर चेकपोस्ट और मालपहाड़ी थाना क्षेत्र में विशेष जांच की मांग की है।

सरकार पर बढ़ा दबाव

सत्ताधारी दलों के भीतर से उठ रहे इन सवालों ने सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है। अब देखना होगा कि सरकार इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती है और क्या वाकई अवैध खनन के इस कथित सिंडिकेट पर नकेल कस पाती है या नहीं।

झारखंड में अवैध खनन का यह मुद्दा आने वाले दिनों में और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।

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