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झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भगवान बिरसा मुंडा और अन्य महापुरुषों का किया अपमान: Pratul Shahdeo

“शहीदों की तस्वीरों को मंच पर पैरों के नीचे लगाना शर्मनाक, झामुमो तुरंत मांगे सार्वजनिक माफी” – Pratul Shahdeo

Pratul Shahdeo: झारखंड की राजनीति में शहीदों और महापुरुषों के सम्मान को लेकर बयानबाज़ी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी ने भगवान बिरसा मुंडा, बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर, सिद्धू-कान्हू सहित कई महापुरुषों का अपमान किया है।

मंच पर पैरों के नीचे लगी थीं तस्वीरें: Pratul Shahdeo

प्रतुल शाहदेव के अनुसार, झामुमो से जुड़े एक संगठन की हालिया बैठक के दौरान मंच पर बैठे झामुमो नेताओं के पैरों के ठीक नीचे महापुरुषों की तस्वीरें लगाई गई थीं।

“यह न केवल अपमानजनक है बल्कि झामुमो की शहीदों के प्रति असंवेदनशील मानसिकता को दर्शाता है।”

उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता भगवान बिरसा मुंडा को देवता के रूप में पूजती है, और बाबासाहेब अंबेडकर संविधान निर्माता और दलितों के मसीहा हैं। ऐसे महान व्यक्तित्वों की तस्वीरों को मंच के नीचे लगाना पूरी तरह अनादर और घोर लापरवाही का प्रतीक है।

इंडी गठबंधन की घटिया सोच उजागर: Pratul Shahdeo

प्रतुल शाहदेव ने इस अवसर पर इंडी गठबंधन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह घटना पहली बार नहीं है।

“कुछ समय पहले लालू प्रसाद यादव के जन्मदिन समारोह में बाबासाहेब अंबेडकर की तस्वीर उनके पैरों के पास रखी गई थी। उन्होंने इसे हटाने से भी इनकार किया था।”

प्रतुल ने कहा कि यह सभी घटनाएं इंडी गठबंधन की महापुरुषों के प्रति घटिया सोच को उजागर करती हैं।

माफी नहीं मांगी, शर्मिंदगी भी नहीं: Pratul Shahdeo

भाजपा प्रवक्ता ने झामुमो को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इस शर्मनाक घटना के बाद पार्टी के किसी भी नेता ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी है, न ही कोई शोक या आत्ममंथन हुआ है।

“इससे साफ है कि उन्हें अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं है। लेकिन झारखंड की जनता यह अपमान कभी नहीं भूलेगी।”

तुरंत माफी मांगे झामुमो: Pratul Shahdeo

प्रतुल शाहदेव ने झामुमो से तत्काल सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की और कहा:

“भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, और बाबासाहेब अंबेडकर जैसे महापुरुषों का अपमान झारखंड की आत्मा को ठेस पहुंचाता है। झामुमो अगर इन महापुरुषों का सम्मान करता है, तो उसे अपनी गलती माननी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।”

इस पूरे विवाद ने झारखंड की राजनीति में नैतिकता और प्रतीकों के सम्मान को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। भाजपा के हमले और झामुमो के जवाबी बयानों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में जनता का विश्वास किसे मिलता है — महापुरुषों के नाम पर राजनीति करने वालों को, या उनकी विचारधारा को सच्चे अर्थों में अपनाने वालों को।

 

 

 

 

 

 

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