Jharkhand News: झारखंड में सामने आ रहे कथित ट्रेजरी घोटाले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। मामले को लेकर अब मुख्यमंत्री से CBI या न्यायिक जांच की मांग उठने लगी है। आरोप है कि यह सिर्फ वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि राज्यभर में फैला एक संगठित भ्रष्टाचार नेटवर्क हो सकता है।
जानकारी के मुताबिक, बोकारो से शुरू हुआ यह मामला अब हजारीबाग, साहिबगंज, गढ़वा और पलामू तक पहुंच चुका है। शुरुआती जांच में ही करीब 35 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी की बात सामने आ रही है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि घोटाले का दायरा इससे कहीं बड़ा हो सकता है।
कैसे फैला पूरा नेटवर्क?: Jharkhand News
शुरुआत में यह मामला केवल एक जिले तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ कई जिलों में एक जैसे पैटर्न सामने आए हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कोई छोटा घोटाला नहीं, बल्कि राज्यव्यापी संगठित खेल हो सकता है।
“एक कर्मचारी नहीं कर सकता इतना बड़ा खेल”: Jharkhand News
मामले में एक लेखपाल को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या कोई अकेला व्यक्ति ई-प्रणाली में छेड़छाड़ कर करोड़ों की निकासी कर सकता है? आरोप है कि इस पूरे मामले में बड़े स्तर पर मिलीभगत हो सकती है, जिसमें कई अधिकारी और तकनीकी तंत्र शामिल हो सकते हैं।
पुलिस विभाग पर भी सवाल: Jharkhand News
सबसे गंभीर आरोप यह है कि पुलिस विभाग के माध्यम से ही निकासी हुई और कई बार एक ही खाते में रकम ट्रांसफर होती रही, लेकिन किसी स्तर पर रोक नहीं लगी। इससे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
बढ़ता जा रहा घोटाले का आंकड़ा
- बोकारो: शुरुआती 3.5 करोड़ से बढ़कर 6 करोड़ तक
- हजारीबाग: करीब 28 करोड़ तक की निकासी का आरोप
सिर्फ दो जिलों में ही आंकड़ा 30 करोड़ पार कर चुका है। अन्य जिलों को जोड़ने पर यह रकम और बढ़ने की आशंका है।
तकनीकी भूमिका पर भी संदेह
घोटाले में तकनीकी सिस्टम से छेड़छाड़ की भी आशंका जताई जा रही है। ऐसे में IT सिस्टम और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच की मांग भी उठ रही है।
CBI या न्यायिक जांच की मांग
मामले में कई स्तर के अधिकारियों के संदेह के घेरे में आने के कारण निष्पक्ष जांच पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मांग की जा रही है कि
- या तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी जाए
- या फिर Jharkhand High Court के किसी वर्तमान न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच कराई जाए
झारखंड का यह कथित ट्रेजरी घोटाला अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दे में बदल चुका है। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह राज्य के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक हो सकता है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर है क्या निष्पक्ष जांच होगी और क्या दोषियों पर कार्रवाई हो पाएगी?
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