Jharkhand News: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि उनकी सरकार झारखंड को केवल एक औद्योगिक राज्य ही नहीं, बल्कि एक ‘एजुकेशन हब’ के रूप में भी विकसित करना चाहती है। जिंदल फाउंडेशन के साथ मिलकर राज्य के मेधावी छात्रों और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
साझेदारी के 4 मुख्य स्तंभ
1. छात्रवृत्ति (Scholarship): हाशिए पर रहने वाले मेधावी छात्रों और छात्राओं के लिए 50:50 की लागत साझेदारी पर छात्रवृत्ति दी जाएगी। यह छात्रवृत्ति कानून, सार्वजनिक नीति (Public Policy) और प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के लिए होगी। इसमें खिलाड़ियों के लिए विशेष ‘खेल-आधारित छात्रवृत्ति’ भी शामिल है।
2. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना: IIT-ISM धनबाद और BIT सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर एक रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा। यह केंद्र स्टील सेक्टर, खनिज प्रसंस्करण और क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) में नवाचार को बढ़ावा देगा।
3. अधिकारियों का क्षमता निर्माण: JPSC के माध्यम से चयनित 30 प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए साल में दो बार विशेष वैश्विक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे राज्य के शासन और सेवा वितरण में सुधार होगा।
4. सार्वजनिक नीति और जलवायु शोध: पूर्वी भारत की भौगोलिक चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित शैक्षणिक सहयोग किया जाएगा, ताकि समावेशी शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
क्यों जरूरी है यह साझेदारी?
जिंदल फाउंडेशन के अनुसार, रामगढ़ और पतरातू के ‘स्टील हब’ के रूप में विकसित होने के कारण राज्य में कुशल मैनपावर (Skilled Manpower) की भारी मांग है। यह पहल न केवल इस मांग को पूरा करेगी, बल्कि राज्य के मानव विकास सूचकांक (HDI) में भी सुधार लाएगी।
“हम चाहते हैं कि झारखंड का मानव संसाधन इतना सशक्त हो कि वे केवल राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकें।” – हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री



