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Jharkhand BJP: बागी नेताओं को ‘शोकॉज’, झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह का भी नाम

रांची | Jharkhand BJP: झारखंड में होने वाले शहरी निकाय चुनाव (Urban Body Elections) भले ही कागजों पर दलीय आधार पर नहीं लड़े जा रहे हों, लेकिन राजनीतिक जमीन पर घमासान पूरी तरह राजनीतिक है। अपनी ही पार्टी के समर्थित उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतरने वाले 19 बागियों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा चाबुक चलाया है। पार्टी ने इन सभी नेताओं को शोकॉज (कारण बताओ नोटिस) जारी कर अनुशासनहीनता पर जवाब मांगा है।

Jharkhand BJP- अनुशासन का डंडा: 7 दिनों की मोहलत

झारखंड प्रदेश भाजपा महामंत्री और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू की ओर से जारी इस नोटिस में सख्त निर्देश दिए गए हैं:

  • पार्टी विरोधी गतिविधियां: नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि पार्टी के अधिकृत समर्थित उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ना अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।

  • समय सीमा: सभी 19 नेताओं को नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अपना स्पष्टीकरण देना होगा।

  • कड़ी कार्रवाई की चेतावनी: यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो इन नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया जा सकता है।

Jharkhand BJP- प्रमुख नाम: संजीव सिंह पर भी गिरी गाज

इस कार्रवाई की सबसे बड़ी चर्चा झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह को लेकर है।

  • प्रतिष्ठा की जंग: संजीव सिंह (विधायक रागिनी सिंह के पति) ने धनबाद क्षेत्र में पार्टी की नीतियों के खिलाफ जाकर अपनी दावेदारी पेश की है।

  • बड़ा संदेश: भाजपा मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने साफ किया कि पार्टी के लिए अनुशासन सर्वोपरि है, चाहे नेता का कद कितना भी बड़ा क्यों न हो। संजीव सिंह के अलावा पलामू से जानकी ओझा और देवघर से बाबा बलियासे जैसे नाम भी इस सूची में चर्चा का विषय हैं।

Jharkhand BJP- कल से शुरू होगा दिग्गजों का प्रचार

निकाय चुनाव में अपनी साख बचाने के लिए भाजपा ने अब अपने भारी भरकम नेतृत्व को मैदान में उतारने का फैसला किया है:

  1. बड़े नेताओं की एंट्री: सोमवार से सी.पी. सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता पार्टी समर्थित उम्मीदवारों के लिए धुआंधार प्रचार शुरू करेंगे।

  2. समर्थन की राजनीति: भले ही चुनाव चिन्ह पार्टी का न हो, लेकिन भाजपा का पूरा तंत्र अपने समर्थित प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने में जुट गया है।

कांग्रेस के बाद अब भाजपा की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव के ‘लिटमस टेस्ट’ के तौर पर देखा जा रहा है। बागियों के खिलाफ यह सख्ती अन्य नेताओं के लिए भी एक कड़ा संदेश है।

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