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अवैध खनन पर मरांडी का बड़ा हमला: ‘सत्ता संरक्षण में चल रहा लूट का खेल’

खनिज संपदा की लूट या सिस्टम की नाकामी? मरांडी ने खोली पोल

झारखंड में अवैध खनन पर सियासी घमासान: बाबूलाल मरांडी का बड़ा आरोप, सरकार पर उठे सवाल

रांची: झारखंड में अवैध खनन और आयरन ओर के कथित अवैध परिवहन को लेकर राजनीति गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने राज्य की Jharkhand Mukti Morcha सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में सत्ता के संरक्षण में अवैध उत्खनन और लूट का कारोबार चल रहा है।

मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि चाईबासा में DMFT (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) के नाम पर पहले से ही गड़बड़ियों की चर्चा थी, लेकिन अब जो बातें सामने आ रही हैं, वे सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और सत्ता संरक्षण की ओर इशारा करती हैं।

🚛 “रोज़ हो रहा अवैध परिवहन”

मरांडी के मुताबिक चाईबासा क्षेत्र में रोज़ाना 40 से 60 हाईवा आयरन ओर का अवैध परिवहन किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सब प्रशासन की मिलीभगत के बिना संभव है?

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस अवैध कारोबार के कारण गरीब आदिवासी लगातार हादसों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन सरकार इस पर संवेदनहीन बनी हुई है।

🧾 “सत्ता से जुड़े नामों पर आरोप”

नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि खुद को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा प्रशासन को गाड़ियों की जानकारी दी जाती है, जिससे यह अवैध नेटवर्क बिना रोक-टोक चलता रहे।

कुछ अन्य नामों का भी जिक्र करते हुए उन्होंने पूछा कि क्या इन लोगों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?

🏛️ “विधानसभा सत्र में दिखावटी कार्रवाई”

मरांडी ने आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र के दौरान केवल दिखावे के लिए अवैध परिवहन रोक दिया जाता है, ताकि सदन में सवाल न उठें। उनके अनुसार यह कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि “मैनेजमेंट” का मामला बन गया है।

⚖️ सरकार से जवाब की मांग

मरांडी ने Hemant Soren से सीधे सवाल करते हुए कहा कि यदि सरकार में नैतिकता बची है, तो इस अवैध कारोबार पर तुरंत रोक लगाई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह माना जाएगा कि इस पूरे मामले में सरकार की मौन सहमति शामिल है।

📌 निष्कर्ष

झारखंड में खनिज संपदा और DMFT फंड को लेकर उठे ये आरोप अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनते जा रहे हैं। खास बात यह है कि सत्ताधारी दल के भीतर से भी ऐसे ही सवाल उठने की चर्चा है, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।

अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या किसी स्तर पर जांच या कार्रवाई होती है

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