India-China Relations: भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा और भविष्य की तकनीक के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक बिसात बिछाई है। भारत सरकार अब ब्राजील, कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड्स के साथ हाथ मिलाकर क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की तैयारी कर रही है। यह कदम न केवल औद्योगिक विकास के लिए जरूरी है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते कद को भी दर्शाता है।
1. क्यों खास है यह कूटनीतिक पहल?- India-China Relations
क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स) आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। स्मार्टफोन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और मिसाइल गाइडिंग सिस्टम तक, हर जगह इनका उपयोग होता है।
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उद्देश्य: खनिजों की खोज, खनन, प्रसंस्करण (Processing) और रीसाइक्लिंग में सहयोग।
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रणनीति: आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) में विविधता लाना ताकि भविष्य में चीन जैसे देशों के ‘सप्लाई कट’ के जोखिम से बचा जा सके।
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तकनीक: भारत इन विकसित देशों से अत्याधुनिक खनिज-प्रसंस्करण तकनीक हासिल करने की योजना बना रहा है।
2. चार देशों का ‘पावर गेम’: भारत की रणनीति- India-China Relations
भारत का खान मंत्रालय अलग-अलग स्तरों पर इन चार प्रमुख देशों से बातचीत कर रहा है:
कनाडा के साथ भारत का समझौता ‘एक्टिव कंसीडरेशन’ में है। मार्च 2026 में संभावित द्विपक्षीय बैठकों के दौरान यूरेनियम, ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। कनाडा के पास न केवल खनिज भंडार है, बल्कि उनके पास दुनिया की बेहतरीन खनन तकनीक भी है।
जर्मनी मॉडल का अनुसरण
भारत जनवरी में जर्मनी के साथ हुए समझौते के प्रावधानों को इन नए देशों के साथ भी लागू करना चाहता है। इसमें ‘तीसरे देश’ में खनिज संपत्तियों का मिलकर अधिग्रहण करना शामिल है। यानी भारत और उसके साझेदार देश मिलकर अफ्रीका या दक्षिण अमेरिका के खनिज भंडारों को विकसित कर सकते हैं।
फ्रांस और नीदरलैंड्स: तकनीक और शोध
यूरोपीय देशों के साथ भारत का फोकस मुख्य रूप से शोध और रीसाइक्लिंग पर है। दुर्लभ खनिजों को कचरे से निकालने (Urban Mining) की कला में ये देश अग्रणी हैं।
3. चीन पर निर्भरता: एक रणनीतिक जोखिम
वर्तमान में दुनिया के रेयर अर्थ एलिमेंट्स के प्रसंस्करण पर चीन का लगभग 80-90% कब्जा है।
“चीन पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए एक रणनीतिक जोखिम है। खनन परियोजनाएं समय लेने वाली होती हैं (5 से 7 साल), इसलिए भारत को आज ही ठोस कदम उठाने होंगे।”
— खनन विशेषज्ञ (स्रोत: TOI)
4. भारत का अब तक का सफर: भविष्य की राह
भारत ने 2023 में 20 से अधिक खनिजों को ‘रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण’ घोषित किया था। इस दिशा में भारत की अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
| देश | समझौते की स्थिति | मुख्य फोकस |
| ऑस्ट्रेलिया | समझौता संपन्न | लिथियम और कोबाल्ट |
| अर्जेंटीना | समझौता संपन्न | लिथियम ब्लॉक का अधिग्रहण |
| जापान | सक्रिय सहयोग | रेयर अर्थ और चिप निर्माण |
| चिली और पेरू | बातचीत जारी | तांबा और लिथियम |
5. निष्कर्ष: खनिज नहीं, ये ‘भू-राजनीतिक ताकत’ हैं
आने वाले समय में वही देश दुनिया पर राज करेगा जिसके पास इन खनिजों का नियंत्रण होगा। भारत की यह बहुआयामी रणनीति (Multi-lateral strategy) यह सुनिश्चित करती है कि देश का ‘एनर्जी ट्रांज़िशन’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान कच्चे माल की कमी के कारण न रुके।



