
Ranchi: झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाले के मामले में आईएएस अधिकारी Vinay Kumar Chaubey को अदालत से बड़ी राहत मिली है।
Suspended IAS Officer Vinay Kumar Chaubey Gets Default Bail in Liquor Scam#liqourscam #bail
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एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) अदालत ने उन्हें बीएनएनएस की धारा 187(2) के तहत डिफ़ॉल्ट जमानत प्रदान की। यह फैसला न केवल चौबे के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि एसीबी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जमानत की शर्तें कड़ी, लेकिन जांच से बाहर नहीं होंगे Vinay Kumar Chaubey
अदालत ने चौबे की जमानत को कुछ शर्तों से जोड़ा है। उन्हें 25,000 रुपये के दो निजी मुचलके जमा करने होंगे। साथ ही, वे अदालत की अनुमति के बिना राज्य नहीं छोड़ सकते। इसके अलावा उन्हें अपना मोबाइल नंबर बदलने की अनुमति भी कोर्ट से लेनी होगी। ये शर्तें अदालत ने इसलिए लगाई हैं ताकि जांच प्रभावित न हो और अभियुक्त हर समय जांच एजेंसी की पहुंच में रहे।
शराब वितरण घोटाले में Vinay Kumar Chaubey पर प्रभावशाली पद के दुरुपयोग का आरोप
यह मामला झारखंड के शराब वितरण सिस्टम से जुड़ा है, जहां भारी वित्तीय अनियमितताओं का आरोप है। आईएएस विनय कुमार चौबे पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभावशाली पद का इस्तेमाल कर शराब वितरण से जुड़ी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। एसीबी ने उनकी भूमिका की जांच करते हुए गिरफ्तार किया था, लेकिन समय पर चार्जशीट दाखिल करने में नाकाम रही।
Vinay Kumar Chaubey Bail: एसीबी की सबसे बड़ी गलती – समय पर चार्जशीट दाखिल न कर पाना
कानून के तहत किसी भी अभियुक्त को एक निश्चित समयावधि में चार्जशीट दाखिल न होने पर डिफ़ॉल्ट बेल का अधिकार होता है। एसीबी इस मामले में समयसीमा के भीतर चार्जशीट पेश करने में विफल रही। नतीजतन अदालत ने कानून के प्रावधानों के तहत चौबे को जमानत दे दी। यह एसीबी की बड़ी चूक मानी जा रही है, क्योंकि ऐसे संवेदनशील मामले में जांच एजेंसी से तत्परता की अपेक्षा रहती है।
राजनीतिक दलों ने सरकार पर उठाए सवाल, प्रशासन में भी हलचल
चौबे को मिली जमानत ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी दल इसे सरकार और एसीबी की “लापरवाही” करार दे रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार ने जानबूझकर जांच को कमजोर किया ताकि बड़े अफसर बच निकलें। वहीं, एसीबी का पक्ष है कि सबूत इकट्ठा करने में समय अधिक लग गया, लेकिन अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करते हुए वे आगे भी अपनी जांच जारी रखेंगे।
आगे का रास्ता कठिन, एसीबी के लिए चुनौती सबूत जुटाना
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला झारखंड प्रशासन के लिए एक टेस्ट केस है। यदि एसीबी ठोस सबूतों के साथ अदालत में अपनी दलीलें रखती है तो आगे भी चौबे और अन्य आरोपितों पर शिकंजा कस सकता है। लेकिन मौजूदा हालात में एसीबी की नाकामी ने इस पूरे घोटाले की जांच को संदिग्ध बना दिया है। शराब घोटाले में IAS विनय कुमार चौबे को मिली डिफ़ॉल्ट बेल केवल एक कानूनी राहत है, लेकिन इससे एसीबी की लापरवाही उजागर हुई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या आने वाले दिनों में एसीबी सबूतों के दम पर अपनी छवि सुधार पाती है या फिर यह मामला भी अन्य बड़े घोटालों की तरह धुंधला पड़ जाएगा।



