पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मशहूर चुनावी रणनीतिकार फर्म I-PAC और उसके प्रमुख प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। ED की टीम ने करीब 9 घंटे तक तलाशी ली। यह छापेमारी कथित ‘कोयला चोरी घोटाले’ से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी। हालांकि, कार्रवाई खत्म होते ही आई-पैक ने जांच एजेंसी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। इस कार्रवाई ने न केवल राजनीतिक मोड़ ले लिया है, बल्कि अब यह मामला पुलिस स्टेशन और हाई कोर्ट तक पहुंच गया है।
पुलिस में शिकायत: ED पर ‘दस्तावेज चोरी’ का आरोप
छापेमारी के तुरंत बाद प्रतीक जैन की पत्नी ने कोलकाता के शेक्सपियर सरानी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया है कि:
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ED के अधिकारी तलाशी के दौरान घर से कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज चोरी कर ले गए हैं।
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पुलिस ने इस मामले की पुष्टि की है और कहा है कि वे इन आरोपों की जांच कर रहे हैं।
कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंची I-PAC
कानूनी मोर्चे पर हमला तेज करते हुए आई-पैक ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। फर्म ने अदालत से गुहार लगाई है कि इस छापेमारी को तत्काल रोका जाए और एजेंसी की कार्यप्रणाली पर हस्तक्षेप किया जाए।
ममता बनर्जी का कड़ा विरोध: “चुनावी रणनीति चुराने की कोशिश”
छापेमारी की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मैदान में उतर आईं। वे पहले प्रतीक जैन के आवास और फिर साल्ट लेक स्थित आई-पैक के दफ्तर पहुंचीं। उनके वहां पहुंचने से मौके पर काफी नाटकीय स्थिति बन गई। मुख्यमंत्री के आरोप:
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संवेदनशील डेटा: ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ED का मुख्य उद्देश्य कोयला घोटाला नहीं, बल्कि TMC की चुनाव रणनीति से जुड़े संवेदनशील डेटा, हार्ड डिस्क और आंतरिक दस्तावेजों को जब्त करना है।
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लोकतंत्र पर हमला: उन्होंने इसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को कमजोर करने की एक साजिश करार दिया।
क्यों महत्वपूर्ण है यह छापेमारी?
पश्चिम बंगाल में इस साल के पूर्वार्ध में विधानसभा चुनाव होने हैं। I-PAC न केवल TMC को सलाह देती है, बल्कि पार्टी के आईटी सेल और मीडिया ऑपरेशंस को भी संभालती है। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।



