Ranchi: CM Hemant Soren की अध्यक्षता में आज झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई के प्रस्तावों पर गहन समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM की अध्यक्षता में झारखण्ड राज्य सजा पुनरीक्षण परिषद की बैठक में 6 बंदियों को रिहा करने पर सहमति बनी।मुख्यमंत्री का निर्देश- जेल से रिहा होने वाले इन बंदियों की काउंसलिंग, ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग की व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल हो। pic.twitter.com/j7zvoA6zmA
— Office of Chief Minister, Jharkhand (@JharkhandCMO) March 19, 2026
अदालतों, पुलिस अधीक्षकों और जेल प्रशासन के मंतव्य पर विचार करने के बाद कुल 6 कैदियों को समय पूर्व रिहा करने पर सहमति बनी है।
रिहाई के बाद ‘ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग’ पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जेल से बाहर आने वाले कैदियों को लावारिस नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
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डेटाबेस और काउंसलिंग: रिहा होने वाले कैदियों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाए। उनकी गतिविधियों की नियमित ट्रैकिंग और काउंसलिंग की व्यवस्था हो ताकि वे दोबारा अपराध की ओर न मुड़ें।
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कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ाव: मुख्यमंत्री ने पहल की है कि इन पूर्व कैदियों को सरकार की विभिन्न रोजगारपरक और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए, जिससे वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
डायन कुप्रथा के खिलाफ जन-जागरूकता का आह्वान
बैठक के दौरान CM Hemant Soren ने राज्य के ग्रामीण इलाकों में व्याप्त डायन-बिसाही जैसी कुप्रथाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने निर्देश दिया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि अंधविश्वास के कारण होने वाली हिंसा को नियंत्रित किया जा सके।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रशासनिक और न्यायिक जगत के कई दिग्गज शामिल थे:
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प्रशासनिक: मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, गृह विभाग की अपर सचिव श्रीमती वंदना दादेल।
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पुलिस: डीजीपी श्रीमती तदाशा मिश्रा, आईजी श्री सुदर्शन प्रसाद मंडल, एआईजी श्री तुषार रंजन।
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न्यायिक: विधि विभाग के प्रधान सचिव श्री नीरज कुमार श्रीवास्तव और न्यायिक आयुक्त श्री अनिल कुमार मिश्रा।
सजा पुनरीक्षण परिषद का यह निर्णय मानवीय आधार और कैदियों के आचरण में सुधार को देखते हुए लिया गया है। मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर है कि जेल से निकलने के बाद व्यक्ति एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में अपनी पहचान बना सके।
