झारखंड कांग्रेस में बवाल: राधा कृष्ण किशोर ने नेतृत्व को घेरा, उठाए 8 बड़े सवाल

डबल स्टैंडर्ड’ पर घिरी कांग्रेस: राधा किशोर ने खोला मोर्चा

झारखंड कांग्रेस में बड़ी बगावत: राधा कृष्ण किशोर ने खोला मोर्चा, प्रदेश नेतृत्व पर उठाए तीखे सवाल

रांची: झारखंड विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख दल कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है। वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने प्रदेश प्रभारी के. राजू को एक के बाद एक कई पत्र लिखकर संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी के भीतर “दोहरे मापदंड” और “स्थानीय मुद्दों पर चुप्पी” को लेकर प्रदेश नेतृत्व की जमकर घेरेबंदी की है।


“एक आँख में सुरमा और दूसरे में काजल”: अनुशासन पर सवाल

राधा कृष्ण किशोर ने पार्टी के अनुशासनात्मक फैसलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि संगठन में दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि बड़कागांव के कद्दावर नेता योगेंद्र साव को आखिर किस कसूर में तीन साल के लिए निष्कासित किया गया, जबकि पार्टी को सार्वजनिक रूप से कोसने वाली रमा खलखो को चुनाव प्रबंध समिति में महत्वपूर्ण जगह दी गई। उन्होंने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को तोड़ने वाला फैसला बताया।


जंबो कमेटी पर तंज: 314 या 628, संख्या से क्या फर्क पड़ता है?

प्रदेश कांग्रेस द्वारा हाल ही में घोषित 314 सदस्यों की भारी-भरकम ‘जंबो कमेटी’ पर तंज कसते हुए किशोर ने कहा कि यदि पार्टी स्थानीय मुद्दों पर मौन रही, तो सदस्यों की संख्या दोगुनी (628) करने से भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने नेतृत्व को सलाह दी कि ‘जंबो-जेट समिति’ बनाने के बजाय संगठन की मजबूती के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है।


8 ज्वलंत मुद्दे, जिन पर प्रदेश नेतृत्व को घेरा

अपने पत्र में राधा कृष्ण किशोर ने 8 प्रमुख बिंदुओं के जरिए कांग्रेस की दुखती रग पर हाथ रखा है:


“पार्टी विरोधी नहीं, पार्टी हित की बात”

राधा कृष्ण किशोर ने पत्र के अंत में स्पष्ट किया कि जनता के मुद्दों को उठाना ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधि नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि पार्टी को ऐसा लगता है, तो वे किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार हैं।

अंत में उन्होंने एक सधा हुआ संदेश देते हुए कहा—
“एक को साधिए, झारखंड कांग्रेस में सब सध जाएगा।”


निष्कर्ष

झारखंड कांग्रेस के भीतर उठी यह बगावत सिर्फ एक नेता की नाराजगी नहीं, बल्कि संगठन के अंदर गहराते असंतोष का संकेत है।
चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

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