दमन नहीं, संवाद की राह: JSSC-JPSC विवाद पर हेमंत सरकार का बड़ा फैसला, छात्रों का भरोसा जीतने का दावा
Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार के फैसले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। सरकार की ओर से परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच और संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को छात्र आंदोलन की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि परीक्षा रद्द होना अंतिम समाधान नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है।
26 दिनों से जारी था छात्रों का आंदोलन
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का आंदोलन लंबे समय से जारी था। छात्र JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बनाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है। इसलिए केवल परीक्षा आयोजित कराना ही नहीं, बल्कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।
सरकार ने बातचीत का रास्ता अपनाया
छात्र आंदोलन के बीच सरकार की ओर से बातचीत का सिलसिला शुरू किया गया। अधिकारियों और मंत्रियों की टीम ने आंदोलनकारी छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर में बातचीत की।
सरकार का दावा है कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मामलों पर विचार किया गया और इसके बाद कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसी क्रम में JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला
सरकार की ओर से 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा समेत विवादों में रही परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई का फैसला लिया गया। इसके साथ ही TDPL एजेंसी के माध्यम से वर्ष 2014 से अब तक आयोजित कराई गई परीक्षाओं की भी जांच की बात कही गई है।
इस फैसले के बाद छात्र आंदोलन में शामिल नेताओं ने इसे अपनी मांगों की दिशा में बड़ी सफलता बताया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि असली लड़ाई अब परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और दोषियों को सजा दिलाने की है।
कथित परीक्षा गड़बड़ी की जांच और गिरफ्तारियां
JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी सामने आई है। कथित परीक्षा अनियमितताओं के मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। जांच का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के पीछे मौजूद नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की पहचान करना है।
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब निगाहें जांच की प्रगति और उसके अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हैं।
2014 से अब तक की परीक्षाओं की जांच क्यों महत्वपूर्ण?
सरकार द्वारा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने की घोषणा के बाद इसका दायरा काफी व्यापक हो गया है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं किसी एक परीक्षा तक सीमित थीं या इसके पीछे लंबे समय से कोई व्यवस्था या नेटवर्क काम कर रहा था।
यदि जांच में पुरानी परीक्षाओं में भी गड़बड़ी सामने आती है, तो उसका असर उन नियुक्तियों और अभ्यर्थियों पर भी पड़ सकता है जो इन परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी सेवा में पहुंचे हैं।
छात्रों की लड़ाई अभी खत्म नहीं
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो समेत आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि परीक्षा रद्द होना छात्रों की बड़ी जीत जरूर है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली, कथित गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था शामिल है।
छात्र संगठनों का कहना है कि सरकार को ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिसमें किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की जरूरत न पड़े।
अब असली चुनौती परीक्षा व्यवस्था में सुधार की
JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता बहाल करना सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। परीक्षा रद्द करना तत्काल विवाद का समाधान हो सकता है, लेकिन लंबे समय में भर्ती प्रक्रिया को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना जरूरी होगा।
इसके लिए प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल सिस्टम, एजेंसियों की जवाबदेही और शिकायतों के त्वरित निपटारे जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करना होगा।
छात्रों के आंदोलन और सरकार के फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जांच के निष्कर्ष क्या सामने आते हैं और झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को कितना भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
