LPG Gas Crisis: पश्चिम एशिया युद्ध का असर भारत तक, गैस सिलेंडर की किल्लत से रेस्टोरेंट, मेस और स्ट्रीट फूड कारोबार प्रभावित
देशभर में इन दिनों LPG गैस सिलेंडर को लेकर भारी संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कई शहरों में रेस्टोरेंट, होटल, ढाबे और स्ट्रीट फूड की दुकानों को या तो बंद करना पड़ रहा है या फिर सीमित मेन्यू के साथ काम चलाना पड़ रहा है। कहीं कोयले और लकड़ी के चूल्हे का सहारा लिया जा रहा है, तो कहीं इंडक्शन पर खाना बनाया जा रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी लॉज और PG में रहने वाले छात्र-छात्राओं को हो रही है। कई जगहों पर मेस बंद हो चुके हैं, जिससे समय पर खाना नहीं मिल पा रहा है। स्थिति ऐसी बन गई है कि कई छात्र-छात्राएं पढ़ाई बीच में छोड़कर घर लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध से टूटी सप्लाई चेन
दरअसल, इस संकट की जड़ पश्चिम एशिया में चल रहे अमेरिका–इजराइल–ईरान युद्ध को माना जा रहा है। इस संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते LPG गैस के जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है।
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
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देश में रोजाना करीब 80–90 हजार मीट्रिक टन LPG की खपत होती है।
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लगभग 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं।
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भारत खुद करीब 40% उत्पादन करता है, जबकि 60% LPG आयात करता है।
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इस आयात का 85–90% हिस्सा कतर, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों से आता है, जो ज्यादातर हॉर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत पहुंचता है।
युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन टूट गई है। हालांकि कुछ जहाजों को गुजरने की अनुमति दी गई है, लेकिन कुल मिलाकर आयात पर बड़ा असर पड़ा है।
कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देते हुए होटल, रेस्टोरेंट और बड़े किचन में इस्तेमाल होने वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई सीमित कर दी है।
इसका सीधा असर देश के बड़े शहरों में दिख रहा है।
बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, कोच्चि और दिल्ली-NCR जैसे शहरों में सैकड़ों छोटे-बड़े होटल और स्ट्रीट फूड स्टॉल बंद होने लगे हैं।
कई जगहों पर रेस्टोरेंट्स ने अपने मेन्यू से
जैसे आइटम हटा दिए हैं, क्योंकि इन्हें बनाने में ज्यादा गैस खर्च होती है।
पैनिक बाइंग से बढ़ी समस्या
गैस संकट की खबरों के बीच लोगों में डर का माहौल भी बन गया है। कई घरों में पहले से सिलेंडर भरे होने के बावजूद लोग नया सिलेंडर बुक करा रहे हैं।
दिल्ली में जहां पहले रोजाना लगभग 55 लाख सिलेंडर बुकिंग होती थी, अब यह संख्या बढ़कर 75 लाख से ज्यादा हो गई है।
रांची जैसे शहरों में नए या डबल कनेक्शन देने पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं और भीड़ के कारण कई जगहों पर अफरा-तफरी की स्थिति बन रही है। कुछ एजेंसी संचालकों की तबीयत तक बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं।
छात्रों और छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर
इस संकट का सबसे ज्यादा असर छात्रों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा है।
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PG और हॉस्टल के मेस बंद हो रहे हैं
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स्ट्रीट फूड दुकानदारों की आमदनी ठप हो रही है
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छोटे ढाबों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है
कई जगहों पर दुकानदार मजबूरी में लकड़ी या कोयले के चूल्हे जला रहे हैं, लेकिन उससे काम पूरी तरह नहीं चल पा रहा है।
सरकार की अपील – पैनिक न करें
सरकार का कहना है कि घरेलू LPG की सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। हालांकि जिस तरह से अफवाहों और पैनिक बाइंग की स्थिति बन रही है, उससे हालात और बिगड़ने का खतरा भी बढ़ गया है।
कई विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही आयात की स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर सिर्फ रसोई तक ही नहीं बल्कि देश के छोटे-बड़े खाद्य कारोबार पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।
आगे क्या?
फिलहाल पूरा देश इस गैस संकट के असर को महसूस कर रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार कितनी जल्दी LPG आयात की व्यवस्था को सामान्य कर पाती है और लोग इस स्थिति में कितना संयम बनाए रखते हैं।
क्योंकि अगर सप्लाई चेन जल्द बहाल नहीं हुई, तो यह संकट देश की रसोई से लेकर होटल उद्योग और लाखों छोटे कारोबारियों तक को गहराई से प्रभावित कर सकता है।