नई दिल्ली: 13 फरवरी, 2026 आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में नवनिर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘Seva Tirtha‘ का भव्य उद्घाटन किया। विजया एकादशी के शुभ अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने न केवल आधुनिक भारत की नई प्रशासनिक शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागकर ‘नागरिक-केंद्रित’ सुशासन का एक नया दर्शन भी दुनिया के सामने रखा।
गुलामी के प्रतीकों से मुक्ति का संकल्प- Seva Tirtha
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पुरानी इमारतों, विशेषकर साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का जिक्र करते हुए कहा कि ये इमारतें ब्रिटिश शासन की सोच और दबदबे को बनाए रखने के लिए बनाई गई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2014 के बाद से देश ‘गुलामी की मानसिकता’ को जड़ से मिटाने के अभियान पर है। पीएम ने कहा, “साउथ ब्लॉक जहाँ ब्रिटिश हुकूमत की नीतियों को लागू करने के लिए बना था, वहीं सेवा तीर्थ 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाया गया है।” उन्होंने घोषणा की कि पुरानी ऐतिहासिक इमारतों को अब एक भव्य संग्रहालय (म्यूजियम) में तब्दील किया जाएगा, जो आने वाली पीढ़ियों को भारत की विकास यात्रा की याद दिलाएगा।
‘Seva Tirtha’ का दर्शन: अधिकार नहीं, कर्तव्य
प्रधानमंत्री ने विस्तार से समझाया कि इस नए परिसर का नाम ‘सेवा तीर्थ’ क्यों रखा गया है। उन्होंने कहा कि “सेवा ही परम धर्म है” और यह नाम इस विचार को पुष्ट करता है कि सरकार का सर्वोच्च पद ‘अधिकार’ का नहीं, बल्कि ‘जिम्मेदारी’ और ‘समर्पण’ का केंद्र है।
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नागरिक देवो भव: भवन की दीवारों पर अंकित यह सूत्र वाक्य दर्शाता है कि यहाँ होने वाला हर निर्णय देश के अंतिम व्यक्ति के हित को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
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सत्ता का मिजाज: पीएम ने याद दिलाया कि कैसे रेस कोर्स रोड का नाम बदलकर ‘लोक कल्याण मार्ग’ किया गया और राजपथ को ‘कर्तव्य पथ’। यह परिवर्तन केवल नाम का नहीं, बल्कि शासन की कार्यशैली में आए बुनियादी बदलाव का प्रतीक है।
आधुनिकता और दक्षता का संगम- Seva Tirtha
‘सेवा तीर्थ’ के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 का भी उद्घाटन किया। यह पूरा परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है:
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एकीकृत कार्यप्रणाली: अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही छत के नीचे होंगे, जिससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा।
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डिजिटल और इको-फ्रेंडली: ये भवन 4-स्टार GRIHA मानकों पर आधारित हैं, जिनमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल जैसी अत्याधुनिक तकनीकें इस्तेमाल की गई हैं।
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पारदर्शिता: नए डिजाइन में ‘ओपन फ्लोर’ कॉन्सेप्ट को अपनाया गया है ताकि अधिकारियों के बीच संवाद बढ़े और लालफीताशाही कम हो।
पहले ही दिन लिए गए बड़े फैसले
सेवा तीर्थ में प्रवेश करते ही प्रधानमंत्री ने ‘सेवा’ के संकल्प को सिद्ध करते हुए कई महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए:
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कृषि: कृषि अवसंरचना कोष (AIF) की राशि को 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया।
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महिला सशक्तिकरण: ‘लखपति दीदी’ योजना का लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ करने का महत्वाकांक्षी निर्णय लिया गया।
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स्वास्थ्य (PM-RAHAT): दुर्घटना पीड़ितों के लिए 1.5 लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज की नई योजना को मंजूरी दी गई।
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स्टार्टअप: इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के ‘स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0′ को हरी झंडी मिली।
13 फरवरी का यह दिन, जो नई दिल्ली के उद्घाटन के 95 वर्ष पूरे होने का भी साक्षी है, अब भारत के अपने ‘प्रशासनिक तीर्थ’ के उदय के रूप में याद किया जाएगा। प्रधानमंत्री के शब्दों में, “हम सेवा तीर्थ में ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ हर ईंट भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगी।”
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