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Jharkhand News: आंगनबाड़ी सेविकाओं का सरकार को अल्टीमेटम, अतिरिक्त काम से मुक्ति नहीं तो सामूहिक इस्तीफा

झारखंड में आंगनबाड़ी सेविकाओं का विरोध तेज, बढ़ते काम के बोझ पर नाराजगी

Jharkhand News: झारखंड में आंगनबाड़ी सेविकाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। Jharkhand Anganwadi Workers Union ने आरोप लगाया है कि विभागीय कार्यों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर सेविकाओं पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। यूनियन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उन्हें बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) और जनगणना जैसे अतिरिक्त कार्यों से जल्द मुक्त नहीं किया गया, तो वे सामूहिक इस्तीफा देने को मजबूर होंगी।

“पहले से काम ज्यादा, अब और बोझ”: Jharkhand News

यूनियन के संरक्षक बालमुकुंद सहाय ने कहा कि सेविकाओं को पहले से ही कई अहम जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं, जैसे:

  • बच्चों की शिक्षा और पोषण देखभाल
  • टीकाकरण कार्यक्रम का संचालन
  • गर्भवती और धात्री महिलाओं की निगरानी
  • पूरक पोषाहार और राशन वितरण
  • महिला एवं बाल कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन
  • बीएलओ कार्य

इसके बावजूद अब जनगणना का काम जोड़ दिया गया है, जिसे सेविकाएं “मानसिक उत्पीड़न” बता रही हैं।

केंद्र के निर्देशों की अनदेखी का आरोप: Jharkhand News

यूनियन का दावा है कि Ministry of Women and Child Development ने पहले ही राज्यों को निर्देश दिया था कि आंगनबाड़ी सेविकाओं को अतिरिक्त गैर-विभागीय कार्यों से मुक्त किया जाए।
इसके बावजूद झारखंड में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।

कम मानदेय, सुविधाएं भी नहीं: Jharkhand News

सेविकाओं का कहना है कि उन्हें बेहद कम मानदेय मिलता है:

  • सेविका: ₹11,000 (केंद्र ₹4,500 + राज्य ₹6,500)
  • सहायिका: ₹5,550 (केंद्र ₹2,250 + राज्य ₹3,250)

इसके अलावा, उन्हें अभी तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा, पेंशन और अन्य सुविधाएं भी नहीं मिली हैं।

राज्यभर में 38 हजार से ज्यादा केंद्र

झारखंड में 38,000 से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जहां हजारों सेविकाएं और सहायिकाएं कार्यरत हैं। ऐसे में यह मुद्दा बड़े स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।

आंदोलन की चेतावनी

यूनियन ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा और सामूहिक इस्तीफा भी दिया जा सकता है। आंगनबाड़ी सेविकाओं की यह नाराजगी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और सेविकाओं की मांगों का समाधान कैसे करती है।

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