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बिहार: बिहार हार के बाद Tejashwi Yadav का ‘ऑपरेशन क्लीन’, RJD में बड़े बदलाव की तैयारी

बिहार:  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है। चुनावी हार की समीक्षा के बाद नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav अब पार्टी संगठन में ‘सर्जरी’ करने के मूड में हैं। उन्होंने ‘ऑपरेशन क्लीन’ का खाका तैयार कर लिया है, जिसके तहत भितरघात करने वाले नेताओं और निष्क्रिय पदाधिकारियों पर गाज गिरना तय है।

तेजस्वी का ‘ऑपरेशन क्लीन’: आरजेडी में बड़े बदलाव की तैयारी

 

बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी की सीटों में आई भारी गिरावट (आरजेडी मात्र 25 सीटों पर सिमट गई) के बाद तेजस्वी यादव अब संगठन को नए सिरे से धारदार बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने कड़े फैसले लेने के संकेत दिए हैं।

1. भितरघातियों और निष्क्रिय नेताओं पर होगी कार्रवाई

चुनाव के दौरान जिन नेताओं ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ काम किया या जो निष्क्रिय रहे, उनकी सूची तैयार कर ली गई है। प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने लगभग 300 ऐसे लोगों की लिस्ट तेजस्वी यादव को सौंपी है। इन ‘भितरघातियों’ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। साथ ही, सोशल मीडिया पर पार्टी विरोधी पोस्ट करने वाले करीब तीन दर्जन नेताओं को भी चिह्नित किया गया है।

2. प्रदेश कार्यालय में खुद मोर्चा संभालेंगे तेजस्वी

तेजस्वी यादव पर अक्सर ‘पहुंच से दूर’ रहने के आरोप लगते रहे हैं। इस छवि को बदलने के लिए उन्होंने तय किया है कि वे अब पटना स्थित आरजेडी प्रदेश कार्यालय में नियमित रूप से बैठेंगे। वे न केवल कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे, बल्कि कार्यालय की तमाम गतिविधियों और अनुशासन पर भी खुद नजर रखेंगे।

3. प्रदेश अध्यक्ष का बदलाव और युवा नेतृत्व की मांग

चर्चा है कि वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल के स्वास्थ्य और चुनाव नतीजों को देखते हुए पार्टी किसी युवा और ऊर्जावान नेता को बिहार की कमान सौंप सकती है। 25 जनवरी 2026 को होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। इस बैठक में तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की भी प्रबल संभावना है, ताकि लालू प्रसाद यादव की अस्वस्थता की स्थिति में वे स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सकें।

संगठन में बदलाव के मुख्य बिंदु:

 

  • समितियों का पुनर्गठन: बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक की सभी कमेटियों को भंग कर नए सिरे से पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।
  • A-to-Z का समीकरण: नई कमेटियों में सभी जाति और धर्म के लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि पार्टी की ‘केवल यादव’ वाली छवि को बदला जा सके।
  • सड़क से सदन तक घेराबंदी: हार के बावजूद मिले 1.90 करोड़ वोटों के भरोसे तेजस्वी अब जनहित के मुद्दों पर और आक्रामक रुख अपनाएंगे।

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