
पटना | Bihar Vidhansabha के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को सत्ता पक्ष के भीतर ही तीखी नोकझोंक देखने को मिली। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की पार्टी (लोजपा-आर) के विधायक राजू तिवारी के एक बयान ने सदन में एनडीए के मंत्रियों और विधायकों को असहज कर दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक ने पारंपरिक दाह संस्कार को ‘प्रदूषण’ से जोड़ दिया।
Bihar Vidhansabha: विवाद की जड़: “लकड़ी से शव जलाने पर होता है प्रदूषण”
गोविंदगंज से विधायक राजू तिवारी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत शवदाह गृहों के निर्माण की मांग उठाई। अपनी दलील देते हुए उन्होंने कहा:
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पर्यावरण का हवाला: पारंपरिक तरीके से शव जलाने के लिए लकड़ियों की भारी जरूरत पड़ती है, जिससे वनों की कटाई बढ़ रही है।
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प्रदूषण का तर्क: उन्होंने कहा कि लकड़ी से दाह संस्कार करने पर प्रदूषण फैलता है, इसलिए आधुनिक विद्युत शवदाह गृह समय की मांग हैं।
Bihar Vidhansabha News: मंत्री और भाजपा विधायकों ने जताया कड़ा विरोध
जैसे ही राजू तिवारी ने ‘शवदाह’ और ‘प्रदूषण’ को एक साथ जोड़ा, सत्ता पक्ष के सदस्य उन पर बरस पड़े:
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मंत्री दीपक प्रकाश की आपत्ति: पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने तुरंत टोकते हुए कहा कि दाह संस्कार जैसी पवित्र परंपरा को प्रदूषण से जोड़ना कतई उचित नहीं है। पर्यावरण संरक्षण अलग विषय है, लेकिन इसे इस नजरिए से देखना ठीक नहीं है।
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जीवेश मिश्रा का हस्तक्षेप: भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा समेत अन्य सत्ताधारी सदस्यों ने भी विधायक के शब्दों के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई, जिससे सदन में कुछ देर के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई।
सरकार का जवाब: शहरों के बाद अब गांवों की बारी
विवाद के बीच उपमुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने स्थिति को संभाला और सरकार का रुख स्पष्ट किया:
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शहरी क्षेत्रों में प्रगति: राज्य के 264 नगर निकायों में से 11 में विद्युत शवदाह गृह चालू हैं और 30 अन्य पर काम चल रहा है। सभी महत्वपूर्ण नदी घाटों पर ‘मोक्ष धाम’ बनाने की योजना है।
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ग्रामीण योजना: पंचायती राज मंत्री ने बताया कि 15वीं वित्त आयोग की राशि से पंचायतें स्वयं भी विद्युत शवदाह गृह बनवा सकती हैं। हालांकि, विधायक राजू तिवारी ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि पंचायतों के पास इसके लिए पर्याप्त फंड नहीं है और विभाग को अलग से गाइडलाइन जारी करनी चाहिए।
डिप्टी सीएम ने आश्वासन दिया कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर है। जैसे शहरों में आधुनिकीकरण हो रहा है, वैसे ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यवस्थित शवदाह गृहों के निर्माण पर सरकार प्राथमिकता के आधार पर विचार करेगी।
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