यूक्रेन संकट पर अमेरिका की पलटी और Russia का हमला तेज: क्यों सुपरपावर एकजुट दिख रहे हैं?
हथियारों की आपूर्ति पर अमेरिका की रोक, चीन का मौन समर्थन और रूस के 550 मिसाइल-ड्रोन हमले; वैश्विक कूटनीति में बड़ा मोड़

Russia-Ukrainian War को तीन साल से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में जो हुआ उसने पूरी दुनिया का ध्यान फिर खींचा। रूस ने कीव पर जबरदस्त हवाई हमला किया जिसमें 23 लोग घायल हुए और कई जिलों में भारी तबाही हुई।
Trump Speaks With Putin and Zelensky, Urges End to Ukraine Conflict https://t.co/HeWaDJsGxu pic.twitter.com/DC6dBAuqzD
— Greek Reporter (@GreekReporter) July 4, 2025
रूसी वायुसेना ने बताया कि उसने यूक्रेन पर 550 मिसाइल और ड्रोन से हमला किया, जिसमें अधिकांश ईरान निर्मित शाहिद ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।
Russia-Ukrainian War: अमेरिका ने यूक्रेन को हथियार देने पर लगाई अस्थायी रोक
यूक्रेन की सेना जिस पर पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और सटीक तोपों से हमला रोकने की उम्मीद थी, अब अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति ठप हो चुकी है।
हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि यह स्थायी निर्णय नहीं है और एक “एक बार का फैसला” है, लेकिन इसके राजनीतिक संकेत गहरे हैं।
टैमी ब्रूस, अमेरिकी प्रवक्ता:
“यह हथियारों की पूरी आपूर्ति खत्म करना नहीं है। यह एक स्थिति के जवाब में लिया गया निर्णय है।”
Russia-Ukrainian War: चीन पहले ही यूक्रेन को हथियार देना रोक चुका है
चीन ने कुछ हफ्ते पहले ही साफ किया था कि वह यूक्रेन को हथियार नहीं देगा, जबकि रूस के साथ उसकी सैन्य आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है।
इससे यूक्रेन पर दबाव और बढ़ गया है, क्योंकि दोनों सुपरपावर रूस के पक्ष में या यूक्रेन से तटस्थ हो चुके हैं।
Russia-Ukrainian War: ट्रंप की रणनीति: रूस से नजदीकी, चीन पर दबाव
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद उनकी नीति यूक्रेन को लेकर बदलती दिख रही है।
- ट्रंप पहले रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की बात करते रहे।
- अब उन्होंने हथियारों की कटौती का फैसला लिया है।
- नाटो देशों पर खर्च बढ़ाने का दबाव बनाकर अमेरिका की रणनीति में ‘अमेरिका फर्स्ट’ स्पष्ट दिख रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप इस दांव से
- रूस को खुश करना चाहते हैं,
- चीन पर दबाव बनाना चाहते हैं,
- और अमेरिका की सैन्य क्षमताएं इजरायल-ईरान संकट जैसे अन्य मोर्चों पर तैनात करना चाहते हैं।
Russia-Ukrainian War: यूक्रेन पर दबाव क्यों? क्या ट्रंप कर रहे हैं समझौते की तैयारी
ट्रंप यूक्रेन को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं कि हथियारों के बदले अब सहयोग जरूरी है।
खासकर खनिज समझौतों और अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देने की बात को लेकर।
वहीं, ट्रंप रूस से रिश्ते सुधारने और यूक्रेन पर बातचीत के लिए मजबूर करने की रणनीति अपना रहे हैं।
Russia-Ukrainian War: ट्रंप बनना चाहते हैं ‘शांति के दूत’? नोबेल की तैयारी?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कर खुद को नोबेल शांति पुरस्कार के दावेदार के रूप में पेश करना चाहते हैं।
उनके करीबी सलाहकारों और रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि
- यह एक राजनीतिक दांव है,
- यूक्रेन को कमजोर करके रूस से बातचीत की मेज पर लाना,
- और अमेरिका को अगली वैश्विक लड़ाई के लिए तैयार रखना ट्रंप की योजना है।
क्या अब यूक्रेन अकेला पड़ जाएगा?
- चीन की दूरी,
- अमेरिका की हथियार आपूर्ति में रुकावट,
- और रूस के लगातार बढ़ते हमले…
…ये संकेत दे रहे हैं कि यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन कमजोर हो रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडोमिर जेलेंस्की अमेरिका से स्पष्टता की मांग कर चुके हैं।
निष्कर्ष: क्या सुपरपावर की ‘डील’ में यूक्रेन बलि का बकरा?
- यूक्रेन को अमेरिका और चीन की रणनीति में मोहरा बनने का डर सता रहा है।
- अगर ट्रंप-रूस नजदीकी बढ़ती है, तो युद्ध खत्म होने की संभावना भी बन सकती है।
- लेकिन इसका मतलब यह भी हो सकता है कि यूक्रेन को समझौता करना पड़े और उसकी संप्रभुता से समझौता हो।
आने वाले हफ्तों में यह साफ हो जाएगा कि यह रणनीति यूक्रेन के लिए शांति लाएगी या नई मुश्किलें।
और क्या ट्रंप इस ‘नोबेल मिशन’ में कामयाब होंगे या नहीं?



