
योगेंद्र साव प्रकरण से गठबंधन की राजनीति पर सवाल, कांग्रेस-JMM के बीच बढ़ी बयानबाजी
Ranchi/Hazaribagh: हजारीबाग के खासमहल जमीन विवाद से शुरू हुआ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का प्रकरण अब पार्टी अनुशासन से आगे बढ़कर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच गठबंधन संबंधों की चर्चा का विषय बन गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर योगेंद्र साव की टिप्पणी के बाद JMM नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद कांग्रेस की अनुशासन समिति ने साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
JMM ने कांग्रेस से कार्रवाई की मांग की
योगेंद्र साव के बयान पर JMM नेताओं की ओर से आपत्ति जताई गई। पार्टी की ओर से कहा गया कि गठबंधन सरकार में शामिल किसी दल के नेता की मुख्यमंत्री को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी का राजनीतिक असर पड़ सकता है। JMM के नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
इस घटनाक्रम के बाद मामला सिर्फ योगेंद्र साव के बयान तक सीमित नहीं रहा। अब कांग्रेस और JMM के बीच सार्वजनिक रूप से असहमति सामने आने को लेकर भी राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
कांग्रेस ने भेजा कारण बताओ नोटिस
विवाद के बाद झारखंड प्रदेश कांग्रेस की अनुशासन समिति ने योगेंद्र साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उनसे तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने के साथ ही समिति के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देने को कहा गया है।
नोटिस में पार्टी ने उनके हालिया सार्वजनिक बयान को अनुशासन से जुड़ा मामला बताया है और पूछा है कि पार्टी संविधान के तहत उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
योगेंद्र साव पहले भी झेल चुके हैं कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब योगेंद्र साव के सार्वजनिक बयानों को लेकर कांग्रेस ने कार्रवाई की हो। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2026 में भी मुख्यमंत्री और गठबंधन सरकार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था। बाद में जून 2026 में उनका निष्कासन रद्द कर दिया गया था।
अब दोबारा कारण बताओ नोटिस जारी होने के बाद पार्टी के अगले कदम पर नजर है।
अंबा प्रसाद ने भी जताई असहमति
योगेंद्र साव की बेटी और कांग्रेस विधायक अंबा प्रसाद ने अपने पिता की मुख्यमंत्री को लेकर की गई टिप्पणी से असहमति जताई है। साथ ही उन्होंने गठबंधन के दोनों दलों के नेताओं की सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर सवाल उठाए हैं। इससे पूरे मामले में पार्टी और गठबंधन दोनों स्तरों पर चर्चा और तेज हुई है।
क्या गठबंधन पर पड़ेगा असर?
फिलहाल उपलब्ध घटनाक्रम के आधार पर कांग्रेस-JMM गठबंधन पर किसी निर्णायक संकट की बात कहना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस ने योगेंद्र साव को नोटिस देकर संगठनात्मक स्तर पर अपना रुख स्पष्ट किया है, जबकि JMM की ओर से भी मामले में आपत्ति दर्ज कराई गई है।
हालांकि, यह प्रकरण गठबंधन राजनीति में सार्वजनिक बयानबाजी और आपसी अनुशासन के सवाल को जरूर सामने लाता है। आने वाले दिनों में योगेंद्र साव का जवाब, कांग्रेस की अनुशासन समिति का फैसला और JMM की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रम होंगे।
अब आगे क्या?
योगेंद्र साव को तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना है। इसके बाद कांग्रेस उनके जवाब पर क्या निर्णय लेती है, यह महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि JMM इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों दल इस विवाद को संगठनात्मक स्तर तक सीमित रखते हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि खासमहल जमीन विवाद से शुरू हुआ मामला अब कांग्रेस के आंतरिक अनुशासन और कांग्रेस-JMM गठबंधन के सार्वजनिक समन्वय—दोनों से जुड़ी राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है।



