
JPSC केस में पूर्व एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता की जमानत खारिज, CID ने पेश की 1000 पन्नों की केस डायरी
रांची: JPSC परीक्षा मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व एग्जाम कंट्रोलर श्वेता गुप्ता को अदालत से राहत नहीं मिली है। मंगलवार को CID की विशेष अदालत में उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान CID ने अदालत के समक्ष करीब 1000 पन्नों की केस डायरी पेश की।
CID की ओर से केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण साक्ष्य होने का दावा किया गया। CID और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने श्वेता गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी।
WhatsApp के जरिए Answer Key लीक करने का आरोप
जांच एजेंसी की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि श्वेता गुप्ता ने अपने मोबाइल फोन के WhatsApp के जरिए परीक्षा से संबंधित Answer Key कथित तौर पर लीक की थी।
CID ने इस आरोप के समर्थन में केस डायरी में इलेक्ट्रॉनिक और अन्य साक्ष्यों का उल्लेख किए जाने की बात कही है। इन साक्ष्यों की वास्तविकता और आरोपों की पुष्टि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
अगस्त में हुई थी गिरफ्तारी
श्वेता गुप्ता को अगस्त 2026 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से वह न्यायिक प्रक्रिया के तहत हैं। उनकी ओर से अदालत में जमानत के लिए याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
CID की दलीलों और बचाव पक्ष का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
मामले में 24 से ज्यादा गिरफ्तारियां
JPSC परीक्षा से जुड़े इस मामले की जांच CID कर रही है। अब तक इस मामले में 24 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया, कथित पेपर/Answer Key लीक और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर पड़ताल कर रही है।
पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते पर भी आरोप
इसी मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते की भूमिका को लेकर भी जांच एजेंसी की ओर से आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ एजेंसियों से कथित तौर पर मोटा कमीशन लेने जैसे आरोप सामने आए हैं।
हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में अंतिम रूप से साबित होने तक आरोप ही माने जाते हैं। मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी है।
1000 पन्नों की केस डायरी में क्या है?
CID ने अदालत में पेश की गई करीब 1000 पन्नों की केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ अहम साक्ष्य होने का दावा किया है। इसमें कथित डिजिटल साक्ष्यों और परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों का उल्लेख होने की बात सामने आई है।
अब अदालत के आदेश और आगे की जांच के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों का मामले पर क्या प्रभाव पड़ता है।
नोट: श्वेता गुप्ता और अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। आरोपी तब तक कानून की नजर में दोषी नहीं माने जाते, जब तक अदालत द्वारा दोष सिद्ध न हो।



