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कस्टम्स के ऑफिस नोट का विरोध, अभ्रक मजदूर संघ ने बाबूलाल मरांडी को सौंपा ज्ञापन

कोडरमा में अभ्रक कारोबार पर कस्टम्स के ऑफिस नोट का विरोध, बाबूलाल मरांडी से मिले मजदूर संघ के प्रतिनिधि

कोडरमा में अभ्रक कारोबार पर कस्टम्स के ऑफिस नोट का विरोध, बाबूलाल मरांडी को सौंपा ज्ञापन

कोडरमा: अभ्रक कारोबार से जुड़ी समस्याओं और कस्टम्स विभाग के एक ऑफिस नोट के विरोध में अभ्रक स्क्रैप मजदूर संघ ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी से मुलाकात की। संघ के अध्यक्ष कृष्णा सिंह घटवार के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर कोडरमा-गिरिडीह के मजदूरों, छोटे प्रोसेसरों और निर्यातकों की समस्याओं से अवगत कराया।

बाबूलाल मरांडी ने प्रतिनिधिमंडल को सहयोग का आश्वासन दिया।

कस्टम्स के ऑफिस नोट पर क्या है आपत्ति?

संघ के अनुसार, SIIB-पोर्ट, कस्टम हाउस कोलकाता के असिस्टेंट कमिश्नर की ओर से 3 सितंबर 2026 को जारी ऑफिस नोट में कच्चे, क्रूड या सेमी-प्रोसेस्ड माइका के निर्यातकों से कई दस्तावेज मांगे गए हैं।

इनमें माइन सोर्स सर्टिफिकेट, माइनिंग ई-चालान/ट्रांसपोर्ट चालान, टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल शामिल हैं। ज्ञापन के अनुसार, दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मामलों को SIIB को भेजने का निर्देश दिया गया है।

संघ ने इस व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई है और कहा है कि इससे क्षेत्र के छोटे कारोबारी और मजदूर प्रभावित हो सकते हैं।

बिना सुनवाई के निर्देश जारी करने पर सवाल

अभ्रक स्क्रैप मजदूर संघ ने कहा कि वह वैध सोर्सिंग और रॉयल्टी भुगतान का समर्थन करता है, लेकिन बिना संबंधित पक्षों को सुने इस तरह के निर्देश जारी करने से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

संघ का दावा है कि निर्यात नीति से जुड़े निर्णय का अधिकार DGFT और वाणिज्य मंत्रालय के स्तर पर है। उसने HS Code 2525 के तहत अभ्रक को ‘फ्री’ श्रेणी में होने का हवाला देते हुए अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग पर सवाल उठाया है।

संघ ने यह भी कहा कि बिहार माइका एक्ट, 1947 के तहत निर्मित और प्रोसेस्ड माइका को अलग श्रेणी में देखा जाता है और उसे कच्चे अभ्रक की श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा।

हजारों मजदूरों की आजीविका पर असर की आशंका

संघ के अनुसार, कोडरमा और गिरिडीह क्षेत्र में बड़ी संख्या में मजदूर पुराने खनन कार्यों से बचे अभ्रक स्क्रैप को सतह से चुनकर अपनी आजीविका चलाते हैं।

संघ का कहना है कि ऐसे मजदूरों के लिए माइन सोर्स सर्टिफिकेट उपलब्ध कराना व्यावहारिक रूप से मुश्किल है। यदि इस तरह की दस्तावेजी व्यवस्था लागू होती है, तो छोटी प्रोसेसिंग इकाइयों के बंद होने और रोजगार प्रभावित होने की आशंका है।

केंद्रीय मंत्री के पत्र का भी दिया हवाला

ज्ञापन में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के 27 अगस्त 2026 के पत्र का भी हवाला दिया गया है। संघ का दावा है कि इस पत्र में अभ्रक को ‘फ्री’ श्रेणी में बताया गया है।

इसी आधार पर संघ ने कस्टम्स के ऑफिस नोट की समीक्षा की मांग की है।

संघ ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

अभ्रक स्क्रैप मजदूर संघ ने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • 3 सितंबर 2026 के ऑफिस नोट को वापस लिया जाए।
  • अतिरिक्त दस्तावेजों की व्यवस्था DGFT से परामर्श के बाद ही तय की जाए।
  • कोडरमा-गिरिडीह के अभ्रक मजदूरों की आजीविका और रोजगार सुरक्षित किया जाए।

अब इस मामले में संबंधित केंद्रीय विभाग और कस्टम्स विभाग की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर क्षेत्र के मजदूरों, कारोबारियों और निर्यातकों की नजर है।

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