
MMDR संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद झारखंड का ₹1.36 लाख करोड़ का दावा खत्म, सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी
रांची: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद खान एवं खनिज विकास (MMDR) संशोधन अधिनियम-2026 लागू हो गया है। इसके बाद झारखंड सरकार के केंद्र पर कोयला रॉयल्टी और खनिजयुक्त जमीन के लगान से जुड़े करीब ₹1.36 लाख करोड़ के बकाये के दावे को लेकर नया कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। राज्य सरकार का कहना है कि संशोधित कानून के प्रावधानों से उसका यह दावा प्रभावित हुआ है। अब झारखंड सरकार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है।
संशोधित कानून में क्या बदला?
सरकार के अनुसार, MMDR Act की धारा 2 में संशोधन के बाद केंद्र सरकार का नियामकीय दायरा केवल खानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खनिजयुक्त भूमि तक भी विस्तारित होगा। वहीं धारा 3 में खनिजयुक्त भूमि की नई परिभाषा जोड़ी गई है।
संशोधन में धारा 9D के तहत भी एक नया प्रावधान जोड़े जाने की बात कही गई है। सरकार के अनुसार, यह प्रावधान अन्य कानूनों, न्यायालय के फैसलों, डिक्री या आदेशों के बावजूद प्रभावी होगा। इसके तहत कानून लागू होने से पहले राज्य सरकार द्वारा वसूल नहीं किए गए कुछ कर, उपकर या शुल्क को अमान्य घोषित किए जाने का प्रावधान बताया गया है।
झारखंड सरकार का दावा है कि इससे राज्य के पुराने बकाये की वसूली का रास्ता प्रभावित हुआ है।
2022 से ₹1.36 लाख करोड़ के बकाये की मांग
झारखंड सरकार लंबे समय से केंद्र से करीब ₹1.36 लाख करोड़ के बकाये की मांग करती रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मार्च 2022 में पहली बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
इसके बाद 4 दिसंबर 2022 को तत्कालीन मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर इस राशि पर राज्य का दावा पेश किया था। मार्च 2025 में भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया गया।
राज्य सरकार के अनुसार, यह राशि मुख्य रूप से सरकारी कंपनियों द्वारा कोयला खनन से जुड़े बकाये के रूप में बताई गई है।
प्रधानमंत्री को भी लिखा था पत्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बकाये के भुगतान की मांग की थी। पत्र में राज्य के विकास और सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं पर बकाये का भुगतान नहीं होने के असर का उल्लेख किया गया था।
राज्य सरकार का कहना था कि कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों के बावजूद कोयला कंपनियों से बकाये की राशि का भुगतान नहीं हुआ है।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा है कि संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद राज्य सरकार का ₹1.36 लाख करोड़ के बकाये का दावा प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई लड़ेगी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।
मंत्री के अनुसार, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय लिया है और केस दायर करने के लिए वकील का नाम अंतिम रूप दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर सरकार जनता के बीच भी जाएगी।
केंद्र के कानून पर राज्य सरकार के गंभीर आरोप
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संशोधित कानून को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह संशोधन बड़े व्यवसायियों और पूंजीपतियों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया है।
उन्होंने इसे झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह कानून देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने वाला है।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से इस मामले में क्या कानूनी और राजनीतिक पक्ष रखा गया है, यह सुप्रीम कोर्ट में होने वाली आगामी कार्यवाही में स्पष्ट होगा।
नोट: ₹1.36 लाख करोड़ के बकाये, संशोधित MMDR Act के प्रभाव और इससे जुड़े कानूनी दावों के संबंध में अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और संबंधित सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी।



