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मतदाता सूची पुनरीक्षण पर CEO के. रवि कुमार का बड़ा निर्देश, पुराने मतदाताओं को दस्तावेज देने की जरूरत नहीं

पुराने मतदाताओं को नहीं देना होगा नया दस्तावेज

मतदाता सूची पुनरीक्षण पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी की दो टूक, न छूटे कोई पात्र मतदाता, न जुड़े कोई अपात्र

Ranchi: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों, उप निर्वाचन पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य पूरी तरह स्पष्ट है—कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।

समयबद्ध तरीके से पूरी होगी ट्रेनिंग

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बताया कि 20 जून से मतदाता सूची पुनरीक्षण से संबंधित प्रिंटिंग और प्रशिक्षण कार्य शुरू किया जा चुका है। उन्होंने सभी जिला अधिकारियों को तय समयसीमा के भीतर बीएलओ, बीएलओ सुपरवाइजर और संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण पूरा करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने से फील्ड स्तर पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा और वे मतदाताओं को सही जानकारी उपलब्ध करा सकेंगे।

30 जून से घर-घर पहुंचेंगे बीएलओ

निर्वाचन आयोग की योजना के अनुसार 30 जून से बीएलओ घर-घर जाकर एन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण करेंगे। इस दौरान मतदाताओं की जानकारी का सत्यापन और डेटा मैपिंग की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

के. रवि कुमार ने कहा कि सभी बीएलओ को फॉर्म भरने और पुरानी मतदाता सूची के आधार पर डेटा मैपिंग की पूरी जानकारी दी जाएगी, ताकि वे नागरिकों के बीच फैली अफवाहों और गलतफहमियों को दूर कर सकें।

पुराने मतदाताओं को नहीं देना होगा नया दस्तावेज

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिन नागरिकों का नाम पहले से मतदाता सूची में दर्ज है, उन्हें किसी भी प्रकार का नया दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।

उन्होंने बताया कि—

  • पुरानी मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं को केवल एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा।
  • फॉर्म में पुराने मतदाता विवरण दर्ज करने पर डेटा स्वतः मैप हो जाएगा।
  • यदि माता-पिता का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, तो वह उनके बच्चों के लिए अभिभावक प्रमाण के रूप में मान्य होगा।

गलत जानकारी देने वालों पर होगी कार्रवाई

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मैपिंग प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी देने वाले मतदाताओं को Anomalies (त्रुटिपूर्ण श्रेणी) में रखा जाएगा।

ऐसे मामलों में संबंधित मतदाता को Un-Mapped Category में डालकर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा। सुनवाई के दौरान उन्हें आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे।

ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार, राज्य प्रशिक्षण नोडल पदाधिकारी देवदास दत्ता सहित सभी जिलों के निर्वाचन पदाधिकारी और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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