
राज्यसभा चुनाव की ‘कयामत की रात’: क्रॉस वोटिंग के डर से बढ़ी धड़कनें, नेताओं की साख दांव पर
रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब सिर्फ सांसद चुनने की प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह कई बड़े नेताओं की राजनीतिक प्रतिष्ठा की परीक्षा बन चुका है। मतदान से ठीक पहले सभी दलों में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। सबसे बड़ा डर है क्रॉस वोटिंग का, जिसने राजनीतिक दलों की नींद उड़ा दी है।
18 जून को होने वाले मतदान में सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे, जबकि शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव परिणाम सिर्फ दो राज्यसभा सदस्यों का भविष्य तय नहीं करेंगे, बल्कि यह भी बताएंगे कि किस दल की संगठनात्मक पकड़ और नेतृत्व कितना मजबूत है।
विधायकों पर कड़ी निगरानी
राजनीतिक दलों को सबसे ज्यादा चिंता अपने ही विधायकों को लेकर है। झारखंड के राजनीतिक इतिहास में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक उलटफेर के कई उदाहरण रहे हैं। यही वजह है कि इस बार सभी दलों ने अपने-अपने विधायकों की निगरानी के लिए विशेष रणनीति बनाई है।
मतदान के दौरान प्रत्येक पार्टी ने पार्टी एजेंट और पोलिंग एजेंट नियुक्त किए हैं, जो विधायकों के वोटिंग पैटर्न पर नजर रखेंगे और किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने की कोशिश करेंगे।
कांग्रेस ने दिल्ली से भेजे पर्यवेक्षक
कांग्रेस ने इस चुनाव को बेहद गंभीरता से लिया है। पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व के बजाय केंद्रीय नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए दिल्ली से प्रदेश प्रभारी के. राजू और सिरिबेला प्रसाद को विशेष जिम्मेदारी देकर रांची भेजा है।
दोनों नेता मतदान प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस विधायकों के वोट की निगरानी करेंगे। इससे साफ संकेत मिलता है कि पार्टी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई
एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में होने से भाजपा की प्रतिष्ठा भी सीधे तौर पर जुड़ गई है। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के लिए यह चुनाव संगठनात्मक ताकत साबित करने का अवसर माना जा रहा है।
भाजपा ने भी अपने विधायकों की निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था बनाई है। अमर कुमार बाउरी और नवीन जायसवाल को पार्टी एजेंट बनाया गया है, जबकि अन्य नेताओं को पोलिंग और काउंटिंग एजेंट की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
झामुमो ने भी किया कड़ा इंतजाम
सत्तारूढ़ झामुमो ने अपने 34 विधायकों पर नजर रखने के लिए मंत्री सुदिव्य कुमार और महासचिव विनोद कुमार पांडेय को पार्टी एजेंट बनाया है। दोनों नेता मतदान के दौरान हर गतिविधि पर नजर रखेंगे।
इसके अलावा मिथिलेश ठाकुर और फागू बेसरा को पोलिंग एजेंट की जिम्मेदारी दी गई है।
राजद और माले भी सतर्क
राजद ने अपने वरिष्ठ नेता भोला यादव को पूरी जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं भाकपा माले ने भी अपने विधायकों के वोट सुरक्षित रखने के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था की है।
किसकी साख बचेगी, किसकी बढ़ेगी मुश्किल?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस चुनाव का असर सिर्फ राज्यसभा की दो सीटों तक सीमित नहीं रहेगा। परिणाम आने के बाद यह भी साफ हो जाएगा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो और गठबंधन के अन्य नेताओं की अपने-अपने विधायकों पर कितनी पकड़ है।
अब सबकी नजर 18 जून के मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है, जो झारखंड की राजनीति में कई नए समीकरणों को जन्म दे सकते हैं।



