
जदयू की सूची में सोशल इंजीनियरिंग का बड़ा दांव, पिछड़ा-EBC समीकरण साधने की कोशिश
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही जदयू ने अपने राजनीतिक संदेश भी साफ कर दिए हैं। पार्टी ने इस बार उम्मीदवार चयन में सामाजिक समीकरणों को प्राथमिकता देते हुए एक पिछड़ा और तीन अतिपिछड़ा (EBC) वर्ग के नेताओं पर भरोसा जताया है।
घोषित उम्मीदवारों में निशांत कुमार पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जबकि भारती मेहता, शिवानी प्रजापति और ललन मंडल अतिपिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जदयू ने अपने पारंपरिक EBC वोट बैंक को मजबूत करने और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक फैसला लिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम के जरिए जदयू ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने मजबूत सामाजिक आधार को और विस्तार देना चाहती है। वहीं, एनडीए के भीतर जातीय संतुलन की जिम्मेदारी काफी हद तक भाजपा के हिस्से में छोड़ दी गई है, जो सवर्ण, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं को साधने की कोशिश करेगी।
दो नामों ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
उम्मीदवारों की सूची में शामिल दो नामों ने राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा बटोरी है। पार्टी के अंदर और बाहर कई ऐसे चेहरे थे जिनके नामों की चर्चा चल रही थी, लेकिन अंतिम सूची में कुछ अप्रत्याशित नामों को जगह देकर जदयू नेतृत्व ने सभी को चौंका दिया।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बार परंपरागत चेहरों की बजाय नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को महत्व दिया है। यही वजह है कि उम्मीदवारों के चयन को केवल चुनावी फैसला नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।
जदयू की इस सूची ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी आने वाले चुनावी मुकाबलों में सामाजिक संतुलन और जातीय समीकरणों को अपने सबसे बड़े राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है।



