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सारंडा में नक्सलवाद के अंत की आहट, मिसिर बेसरा के सरेंडर की चर्चा तेज

सारंडा में सुरक्षाबलों का बड़ा दबाव, नक्सलियों के सरेंडर की तैयारी

सारंडा में नक्सलवाद के अंत की आहट, मिसिर बेसरा के सरेंडर की चर्चा तेज

सारंडा जंगल से नक्सलवाद को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। कभी भाकपा माओवादी का सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले सारंडा में अब नक्सल नेटवर्क पूरी तरह कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के बीच एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर के अपने दस्ते के साथ जल्द आत्मसमर्पण करने की चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के अनुसार, झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के संयुक्त अभियान ने नक्सलियों की गतिविधियों पर बड़ा असर डाला है। सुरक्षा एजेंसियों ने जंगल के भीतर मौजूद कथित कॉरिडोर और सप्लाई नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की है, जिससे नक्सली संगठन दबाव में बताए जा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सारंडा क्षेत्र में सुरक्षाबलों की मजबूत तैनाती के कारण नक्सलियों तक रसद और अन्य संसाधन पहुंचाने के रास्ते काफी प्रभावित हुए हैं। लगातार चल रहे अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मिलने वाली सुविधाओं को देखते हुए कई हार्डकोर नक्सलियों के सरेंडर की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों का दावा है कि मिसिर बेसरा के साथ उसके दस्ते के कई सक्रिय सदस्य भी आत्मसमर्पण कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

अगर यह आत्मसमर्पण होता है, तो इसे झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ सबसे बड़ी सफलताओं में से एक माना जाएगा। लंबे समय तक रेड कॉरिडोर का अहम हिस्सा रहे सारंडा में नक्सल गतिविधियों के कमजोर पड़ने को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही हैं।

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