Donald Trump: वरिष्ठ भू-राजनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी के अनुसार, तेहरान में ‘सिर कलम’ (Decapitation) यानी शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने के बावजूद, ईरान की सरकार गिराने की कोशिश नाकाम साबित हुई है। ट्रंप ने हमले के तुरंत बाद ईरानी जनता से विद्रोह करने का आह्वान किया था, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट दिख रही है। चेलानी का मानना है कि ईरान में आत्मसमर्पण के बजाय ‘प्रतिशोध’ की भावना और अधिक प्रबल हो गई है।
डिफेंस सेक्रेटरी और राष्ट्रपति के बयानों में टकराव: Donald Trump
अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी अब सुर बदलते नजर आ रहे हैं। एक ओर राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि वह ईरान की इस्लामिक सत्ता को उखाड़ फेंकना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा मंत्री (U.S. Defense Secretary) पीट हेगसेथ ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है:
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बदला हुआ रुख: हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका का मकसद ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) नहीं, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमताओं और परमाणु ठिकानों को नष्ट करना है।
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विरोधाभास: यह बयान ट्रंप के उस आह्वान के ठीक उलट है जिसमें उन्होंने ईरानियों से अपनी सरकार पर कब्जा करने को कहा था।
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रणनीतिक हार: विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अमेरिका को अहसास हो गया है कि केवल हवाई हमलों से 9 करोड़ की आबादी वाले देश में सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है।
हवाई दबदबा बनाम जमीनी हकीकत: Donald Trump
युद्ध के मैदान में तकनीकी रूप से अमेरिका और इजरायल काफी आगे दिख रहे हैं, लेकिन सामरिक स्तर पर चुनौतियां बरकरार हैं:
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एयर सुपीरियोरिटी (Air Superiority): अमेरिका और इजरायल ने ईरान के आसमान पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है और उसके एयर डिफेंस को पंगु बना दिया है।
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एस्केलेशन डॉमिनेंस (Escalation Dominance): इसका अर्थ है संघर्ष की तीव्रता को अपनी शर्तों पर नियंत्रित करना। विशेषज्ञों का कहना है कि यहाँ अमेरिका मात खा रहा है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागकर यह दिखा दिया है कि वह झुकने को तैयार नहीं है।
“ट्रंप ने युद्ध तो शुरू कर दिया, लेकिन अब इसका रास्ता उनके नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है।” — ब्रह्म चेलानी
ईरान की जवाबी कार्रवाई और भविष्य की चुनौतियां
ईरान ने न केवल पलटवार किया है, बल्कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी भी दी है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति ठप हो सकती है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में कट्टरपंथी गुट और अधिक सक्रिय हो गए हैं, जिससे क्षेत्र में एक लंबे और अनिश्चित युद्ध का खतरा पैदा हो गया है।
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