HeadlinesJharkhandPoliticsStatesTrending

विरासत का दम, ‘सिंह मेंशन’ की पकड़ बरकरार

जेल से बाहर आने के महज छह महीने के भीतर वे धनबाद नगर निगम के मेयर पद पर काबिज हो गए

8 साल बाद जेल से बाहर, अब धनबाद की सियासत के ‘किंग’ बने संजीव सिंह

धनबाद: करीब आठ साल जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद संजीव सिंह ने राजनीति में ऐसी वापसी की है, जिसकी चर्चा पूरे कोयलांचल में हो रही है। जेल से बाहर आने के महज छह महीने के भीतर वे धनबाद नगर निगम के मेयर पद पर काबिज हो गए और एक बार फिर सिंह मेंशन की सियासी ताकत का एहसास करा दिया।

विरासत का दम, ‘सिंह मेंशन’ की पकड़ बरकरार

झरिया के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय सूरजदेव सिंह की विरासत आज भी धनबाद की राजनीति में प्रभावशाली मानी जाती है। उनके निधन के चार दशक बाद भी परिवार का दबदबा कायम है।

सिंह मेंशन से जुड़े परिवार के सदस्य — बच्चा सिंह, विक्रमा सिंह, कुंती देवी और स्वयं संजीव सिंह विधायक रह चुके हैं। रामधीर सिंह जिला परिषद अध्यक्ष और इंदू देवी मेयर रह चुकी हैं। अब संजीव सिंह के मेयर बनने से परिवार की राजनीतिक पकड़ और मजबूत हो गई है।

2017 से शुरू हुआ कठिन दौर

संजीव सिंह का राजनीतिक जीवन 2017 में अचानक बड़े संकट में घिर गया। 2014 में भाजपा के टिकट पर विधायक बने संजीव पर अपने चचेरे भाई और पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या का आरोप लगा।

उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए धनबाद थाने में सरेंडर किया। इसके बाद करीब आठ साल तक वे धनबाद, दुमका और रांची की जेलों में रहे। खराब स्वास्थ्य के कारण उन्हें रिम्स में भी लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा।

27 अगस्त 2025 को अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। इस फैसले के बाद उनकी सक्रिय राजनीति में वापसी का रास्ता साफ हो गया।

रागिनी सिंह की जीत से मिली नई ताकत

संजीव सिंह की अनुपस्थिति में 2019 के विधानसभा चुनाव में सिंह मेंशन को झटका लगा था, जब उनकी पत्नी रागिनी सिंह कांग्रेस प्रत्याशी पूर्णिमा नीरज सिंह से चुनाव हार गई थीं।

हालांकि 2024 के चुनाव में रागिनी सिंह ने जोरदार वापसी की और झरिया सीट दोबारा सिंह मेंशन के खाते में डाल दी। इस जीत ने परिवार के राजनीतिक वनवास को खत्म करने की नींव रखी।

नई पारी, नई चुनौती

मेयर पद पर जीत के साथ संजीव सिंह ने यह साबित कर दिया है कि धनबाद की राजनीति में उनका प्रभाव बरकरार है। हालांकि, अब उनके सामने शहर की विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने और प्रशासनिक नेतृत्व साबित करने की बड़ी चुनौती भी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत सिर्फ व्यक्तिगत वापसी नहीं, बल्कि सिंह मेंशन की सियासी मजबूती का संकेत है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button