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Bihar NDA में शराबबंदी पर ‘बगावत’: कुशवाहा के विधायक बोले- “राजस्व का हो रहा भारी नुकसान, समीक्षा जरूरी”

Patna: Bihar में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘शराबबंदी’ को लेकर अब Bihar NDA के भीतर से ही विरोध के स्वर प्रखर होने लगे हैं। राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक माधव आनंद ने एक बार फिर इस कानून की समीक्षा की मांग उठाकर सरकार को असहज कर दिया है।

Bihar का पैसा जा रहा पड़ोसी राज्यों और नेपाल: Bihar NDA

सोमवार को विधानसभा परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए मधुबनी से विधायक माधव आनंद ने आर्थिक पहलुओं पर सरकार को घेरा। उनके तर्क निम्नलिखित हैं:

  • राजस्व की चपत: माधव आनंद ने कहा कि शराबबंदी की वजह से बिहार को मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा अब उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड और नेपाल की झोली में जा रहा है।

  • 10 साल का लेखा-जोखा: उन्होंने सवाल उठाया कि 10 साल का लंबा समय बीत चुका है। अब सरकार को यह देखना चाहिए कि इस कानून से हमने क्या खोया और क्या पाया। लोगों के स्वास्थ्य और सामाजिक लक्ष्यों पर इसका क्या असर पड़ा, इसकी गहन समीक्षा होनी चाहिए।

  • जनहित सर्वोपरि: उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित के मुद्दे उठाना बगावत नहीं है और इसका मतलब यह कतई नहीं कि वे एनडीए से बाहर जा रहे हैं।

भाजपा विधायक ने भी बताया ‘विफल’: Bihar NDA

शराबबंदी के खिलाफ केवल रालोमो ही नहीं, बल्कि भाजपा के भीतर भी असंतोष दिख रहा है।

  • विनय बिहारी का प्रहार: पिछले सप्ताह लौरिया (पश्चिम चंपारण) से भाजपा विधायक विनय बिहारी ने सदन में अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। उन्होंने कहा कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह विफल है और हर जगह शराब उपलब्ध है। उन्होंने मांग की कि या तो इसे सख्ती से लागू करें या फिर पहले की तरह चालू कर दें।

नीतीश सरकार का रुख: ‘नो रिव्यु’: Bihar NDA

विधायकों के बढ़ते दबाव के बावजूद नीतीश सरकार अपने फैसले पर अडिग है:

  • मंत्री विजय चौधरी का जवाब: पिछले मंगलवार को जब माधव आनंद ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाया था, तब मंत्री विजय चौधरी ने दो-टूक शब्दों में कहा था कि सरकार किसी भी स्तर पर शराबबंदी की समीक्षा करने का विचार नहीं रखती है।

विपक्ष ने ली चुटकी

सत्ता पक्ष में मचे इस घमासान पर विपक्ष (RJD और कांग्रेस) हमलावर है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि बिहार में शराबबंदी केवल कागजों पर है और धरातल पर इसकी ‘होम डिलीवरी’ हो रही है। कांग्रेस के एक विधायक ने तो यहां तक दावा कर दिया कि विधानसभा के भीतर भी शराब मंगवाई जा सकती है।

चुनावी साल के करीब आते ही एनडीए के घटक दलों और स्वयं भाजपा के विधायकों द्वारा शराबबंदी पर सवाल उठाना यह संकेत देता है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बन सकता है।

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