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Tejashwi Yadav ने जताई कर्मचारियों की सैलरी रुकने की आशंका, अशोक चौधरी बोले- “आप चिंता न करें”

पटना | बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने राज्य की आर्थिक स्थिति और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला, जिस पर जेडीयू के कद्दावर नेता और मंत्री अशोक चौधरी ने पलटवार किया है।

Tejashwi Yadav का आरोप: “भ्रष्टाचारियों ने खाली कर दिया खजाना”

तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार की घेराबंदी करते हुए राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:

  • सैलरी का संकट: “बिहार का खजाना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है। हालात इतने खराब हैं कि आने वाले कुछ ही दिनों में सरकार के पास कर्मचारियों को वेतन देने तक के पैसे नहीं बचेंगे।”

  • फिसड्डी बिहार: तेजस्वी ने बिहार को देश का सबसे गरीब और बेरोजगार राज्य बताते हुए कहा कि निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार सबसे निचले पायदान पर है।

  • अपराध और अफसरशाही: उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 21 सालों में एनडीए के शासन में केवल अपराध, तानाशाही और अफसरशाही बढ़ी है। बजट में युवाओं और गरीबों के लिए कुछ भी खास नहीं है।

अशोक चौधरी का पलटवार: “जनता ने इसीलिए 25 पर पहुंचाया”

तेजस्वी के आरोपों पर बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल झूठ के सहारे राजनीति कर रहा है।

  • डेटा की कमी: अशोक चौधरी ने कहा, “तेजस्वी जी के पास कोई डेटा नहीं है, वे सिर्फ हवा में बातें करते हैं। यही कारण है कि जनता ने उन्हें 25 सीटों पर पहुंचा दिया है।”

  • विकास के आंकड़े: मंत्री ने दावा किया कि बिहार में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या घटकर अब मात्र 16 प्रतिशत रह गई है। 1 करोड़ 30 लाख जीविका दीदीयां आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं और इन्फ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक काम हुआ है।

  • खजाने पर जवाब: जब पत्रकारों ने खजाना खाली होने के दावे पर सवाल पूछा, तो अशोक चौधरी ने चुटकी लेते हुए कहा “उनको कहिए कि वो चिंता न करें, सरकार खुद सक्षम और चिंतित है।”

बिहार की राजनीति में यह ‘क्रेडिट वॉर’ और ‘आरोप-प्रत्यारोप’ का दौर बजट सत्र के समापन तक और तेज होने की उम्मीद है। जहां तेजस्वी यादव राज्य को ‘बदहाल’ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सरकार अपने 21 वर्षों के कामकाज के आंकड़ों के साथ उन्हें ‘भ्रम फैलाने वाला’ करार दे रही है।

यह भी पढ़े: Upendra Kushwaha की सीट पर ‘सस्पेंस’ बरकरार, एनडीए के फैसले पर टिकी नजरें

 

 

 

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