Bihar News: आज, 18 फरवरी 2026 को, राज्य के सबसे खूंखार नक्सलियों में से एक, सुरेश कोड़ा के समर्पण ने ‘नक्सल मुक्त बिहार’ के संकल्प को नई मजबूती दी है।
हथियारों के बड़े जखीरे के साथ डाला हथियार: Bihar News
बिहार और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में आतंक का पर्याय माने जाने वाले नक्सली कमांडर सुरेश कोड़ा उर्फ मुस्तकीम ने आखिरकार कानून के सामने घुटने टेक दिए हैं। मुंगेर प्रमंडल के डीआईजी (DIG) और बिहार एसटीएफ (STF) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष उसने अपने हथियार डाले। समर्पण के दौरान सुरेश कोड़ा ने हथियारों का एक भारी जखीरा पुलिस को सौंपा, जिसमें शामिल हैं:
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1 AK-47 राइफल
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1 AK-56 राइफल
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2 इंसास (INSAS) राइफल
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500 से अधिक जिंदा कारतूस
60 से अधिक आपराधिक कांडों में था वांछित: Bihar News
सुरेश कोड़ा नक्सली संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का सक्रिय सदस्य रहा है। पिछले 25 वर्षों से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे इस नक्सली पर मुंगेर, लखीसराय और जमुई के विभिन्न थानों में हत्या, अपहरण, लेवी वसूली और विस्फोट जैसे 60 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसने 2008 और 2010 में दो चौकीदारों की नृशंस हत्या की थी और 2021 में एक नवनिर्वाचित मुखिया की हत्या में भी उसकी मुख्य भूमिका थी।
एसटीएफ की दबिश और पुनर्वास नीति का असर: Bihar News
बिहार एसटीएफ द्वारा मुंगेर की पहाड़ियों और दुर्गम जंगलों में चलाए जा रहे निरंतर अभियानों (जैसे ऑपरेशन शैडो) ने नक्सलियों के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ दिया है। जुलाई 2025 में एक भीषण मुठभेड़ के दौरान कोड़ा घायल हो गया था, जिसके बाद से उस पर दबाव काफी बढ़ गया था। अंततः, राज्य सरकार की ‘आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति’ से प्रभावित होकर और चौतरफा घिर जाने के कारण उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
सरकार की उपलब्धि और भविष्य की योजना
इस सरेंडर को बिहार सरकार और केंद्र के उस लक्ष्य की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है, जिसमें 31 मार्च 2026 तक देश को पूरी तरह नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सुरेश कोड़ा को सरकारी नीति के तहत वित्तीय सहायता, रोजगार प्रशिक्षण और अन्य कानूनी लाभ दिलाए जाएंगे ताकि वह एक सामान्य जीवन जी सके।



