
रांची/दावोस: विश्व आर्थिक मंच (WEF 2026) की वार्षिक बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखंड अपने पर्यटन क्षेत्र की असीम संभावनाओं को वैश्विक पटल पर रखने जा रहा है।
25 वर्ष का “युवा झारखंड” अब केवल खनिजों के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता, जीवंत संस्कृति और रोमांचक पर्यटन के निवेश केंद्र के रूप में दुनिया को आमंत्रित कर रहा है।
WEF 2026: विशिष्ट पर्यटन गंतव्य: जहां प्रकृति और परंपराएं मिलती हैं
झारखंड का पर्यटन किसी कृत्रिम प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि भूमि और लोगों के साथ गहरे संबंधों पर आधारित है।
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झरनों का शहर (रांची): हुंडरू, दशम, जोन्हा और लोध जैसे जलप्रपात पूर्वी भारत के सबसे आकर्षक आकर्षणों में से हैं।
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पहाड़ों की रानी (नेतरहाट): घने जंगलों और श्रृंखलाबद्ध पहाड़ियों से घिरा यह क्षेत्र शांति और सौंदर्य का केंद्र है।
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मैक्लुस्कीगंज: ‘एंग्लो-इंडियन गांव’ के रूप में अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ पर्यटकों को लुभाता है।
WEF 2026: प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्म का अद्भुत संगम
झारखंड का अनुभव यहाँ की आदिवासी विरासत के बिना अधूरा है:
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जीवंत उत्सव: सरहुल, करम, सोहराय और टुसू जैसे त्योहार प्रकृति के प्रति आदिवासी समाज के गहरे जुड़ाव को दर्शाते हैं।
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अद्वितीय कला: सोहराय और कोहबर पेंटिंग, डोकरा आर्ट और छऊ नृत्य यहाँ की रचनात्मकता के स्तंभ हैं।
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आध्यात्मिक केंद्र: देवघर का बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ, रजरप्पा और मलूटी मंदिर समूह इतिहास और आस्था का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।
रोमांच और वाइल्डलाइफ: एडवेंचर प्रेमियों का नया ठिकाना
साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड तेजी से एक अग्रणी राज्य बनकर उभरा है:
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एडवेंचर स्पोर्ट्स: ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, वॉटरफॉल रैपलिंग और पैराग्लाइडिंग के लिए यहाँ की भौगोलिक संरचना सर्वोत्तम है।
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वन्यजीव अभयारण्य: पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा हाथी अभयारण्य, महुआटांड भेड़िया अभयारण्य और उधवा बर्ड सैंच्युरी वाइल्डलाइफ प्रेमियों को एक अलग दुनिया का अहसास कराते हैं।
WEF 2026: निवेश के लिए अनंत अवसर
दावोस के माध्यम से झारखंड सरकार वैश्विक निवेशकों को इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और कल्चरल टूरिज्म के क्षेत्र में साझेदारी का न्योता दे रही है।
“झारखंड का पर्यटन ‘निरंतरता और सह-अस्तित्व’ पर आधारित है। हम निवेशकों को एक ऐसा मंच प्रदान कर रहे हैं जहाँ वे न केवल व्यापार कर सकें, बल्कि पर्यावरण और समुदाय के विकास में भी भागीदार बनें।”
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