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मौत के मुंह से लौटाया जीवन: मंत्री Dr. Irfan Ansari ने बचाई आदिवासी युवक की जान

 

जामताड़ा: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री Dr. Irfan Ansari ने शुक्रवार को मानवता और जनसेवा की मिसाल पेश करते हुए एक गंभीर रूप से बीमार आदिवासी युवक की जान बचाई।

हांफते और दम घुटने की स्थिति में पहुंचे युवक को मंत्री ने न सिर्फ तत्काल प्राथमिक उपचार दिया, बल्कि एम्बुलेंस और मेडिकल टीम बुलाकर खुद उसकी निगरानी में रांची स्थित रिम्स अस्पताल तक पहुंचाया।

गंभीर हालत में Dr. Irfan Ansari आवास पहुंचे परिजन

जानकारी के अनुसार, रुपायडीह निवासी परेश हेंब्रम को जब सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी शुरू हुई तो उनके परिजन उन्हें तत्काल डॉ. अंसारी के जामताड़ा आवास लेकर पहुंचे। उस वक्त परेश की हालत अत्यंत नाजुक थी। परिवार के सदस्य रोते हुए मदद की गुहार लगा रहे थे।

Dr. Irfan Ansari News: तत्काल उपचार और रांची रेफर

डॉ. अंसारी ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत प्राथमिक चिकित्सा दी और स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट किया। एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई और परेश को रांची स्थित रिम्स अस्पताल भेजा गया। उल्लेखनीय है कि मंत्री ने संपूर्ण रास्ते में युवक की स्थिति पर नजर रखी और डॉक्टरों से लगातार संपर्क में रहे।

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इलाज का खर्च उठाया, दी आर्थिक सहायता

रिम्स अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने परेश को इमरजेंसी में भर्ती किया। इलाज के बाद अब युवक की स्थिति स्थिर है और वह खतरे से बाहर हैं। मंत्री डॉ. अंसारी ने इलाज का पूरा खर्च स्वयं वहन किया और पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद भी प्रदान की।

मंत्री ने क्या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. इरफान अंसारी ने कहा,

“मैंने कोई बड़ा कार्य नहीं किया। यह तो मेरा कर्तव्य था। मरीज का कोई धर्म नहीं होता। वह सिर्फ इंसान होता है और मेरे लिए हर जरूरतमंद के दरवाजे खुले हैं, खासकर आदिवासी समाज मेरे दिल के बहुत करीब है।”

उन्होंने आगे कहा,

“जो लोग केवल आलोचना करते हैं, उनसे कहना चाहूंगा कि समाज सेवा केवल भाषणों से नहीं होती, जमीनी स्तर पर उतरकर ही बदलाव लाया जा सकता है।”

 

एक डॉक्टर और जनसेवक के रूप में डॉ. अंसारी का यह कदम न सिर्फ इंसानियत की मिसाल है, बल्कि राजनीति में संवेदनशील नेतृत्व और जमीनी सेवा भावना की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि संवेदनशील प्रशासनिक प्रतिक्रिया कितनी जरूरी होती है, खासकर कमजोर तबकों के लिए।

 

 

 

 

 

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