
Ranchi: Jharkhand की राजनीति में समीकरण लगातार बदलते रहते हैं। हाल ही में भाजपा की प्रत्याशियों की सूची जारी होने से कई अटकलों पर विराम लग गया है।
#WATCH जमशेदपुर: झारखंड विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्व से भाजपा की उम्मीदवार पूर्णिमा साहू दास ने कहा, “…इस विरासत को आगे बढ़ाना है… ” pic.twitter.com/DlWSiywbYN
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 19, 2024
पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के राज्यपाल रघुवर दास की बहू, पूर्णिमा दास साहू, जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी। रघुवर दास के राज्यपाल बनने के बाद भी झारखंड में उनका प्रभाव बरकरार है, और इस चुनाव में उनकी बहू उनकी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का काम करेंगी।
Jharkhand News: राजनीतिक समीकरण में बदलाव, रघुवर दास का प्रभाव बरकरार
राज्य की राजनीति में यह माना जा रहा था कि रघुवर दास ओडिशा के राज्यपाल बनने के बाद झारखंड की राजनीति से दूर हो सकते हैं, लेकिन भाजपा की सूची जारी होने के बाद साफ हो गया कि ऐसा नहीं होगा। उनकी बहू, पूर्णिमा दास साहू, जमशेदपुर पूर्वी सीट से चुनाव लड़ेंगी, जो पहले रघुवर दास की परंपरागत सीट रही है। पूर्णिमा ने छत्तीसगढ़ में पत्रकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी और अब उन्हें अपने ससुर की राजनीतिक विरासत को संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।
Jharkhand News: पिछले चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था
रघुवर दास को पिछले विधानसभा चुनाव में जमशेदपुर पूर्वी सीट से हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार सरयू राय ने हराया था। इस बार, राजनीतिक समीकरण बदलने के बाद, सरयू राय भाजपा की सहयोगी जदयू में शामिल हो गए हैं और उन्हें जमशेदपुर पश्चिम सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया गया है। वहीं, भाजपा की सूची में कई ऐसे नाम शामिल हैं जो रघुवर दास के करीबी माने जाते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उनका झारखंड की राजनीति में अभी भी प्रभाव कायम है।
रघुवर दास का ओबीसी वोट बैंक पर प्रभाव
रघुवर दास, जो झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री बने थे, का ओबीसी और वैश्य समुदाय में गहरा प्रभाव है। भाजपा के लिए उन्हें अलग-थलग करने का जोखिम बड़ा था, क्योंकि इससे इन वोटरों के बीच गलत संदेश जा सकता था। ओडिशा के राज्यपाल बनने के बावजूद रघुवर दास का झारखंड में प्रभाव और लोकप्रियता बनी हुई है।